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हिंदुओं की सबसे खास धार्मिक जगह है पसका सूकर खेत, जानिए क्या है इसकी मान्यता, यहां तक कैसे पहुंचें?

लघु प्रयाग के संगम घाट पर लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान दान किया। पृथ्वी को पाप से मुक्त करने के लिए यहां पर भगवान बाराह ने अवतार लिया था।

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यूपी के गोंडा जिले के परसपुर क्षेत्र स्थित पसका सूकर खेत का अपना धार्मिक महत्व है। यहां पर पवित्र सरयू और घाघरा नदी का संगम होता है। इससे लघु प्रयाग भी कहते हैं। पौष पूर्णिमा को लघु प्रयाग के संगम तट के त्रिमुहानी घाट पर आस्था का जनसैलाब उमड़ता है। आज यहां संगम तट पर लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।

भगवान विष्णु ने वाराह का रूप धारण किया

पुराणों में वर्णित सूकरखेत पसका में हजारों तीर्थ विद्यमान है। पृथ्वी को पाप से मुक्ति दिलाने के लिए इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने सतयुग में वाराह का रूप धारण किया था। हिरण्याक्ष नामक राक्षस का वध कर पृथ्वी को पाप से मुक्त कराया था। इसलिए यह स्थान सूकर खेत के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

स्कंद पुराण में पसका सूकर खेत का उल्लेख

पसका सूकर खेत के इस स्थान का प्रमाण स्कंद पुराण में मिलता है। ‘दशकोटि सहस्त्राणि, दश कोटि शतानि च, तीर्थानि सरयू नद्या घर्घरोदक संगमे।’ जिसका अर्थ है सरयू-घाघरा संगम तट पर हजारों तीर्थ विद्यमान है।

लघु प्रयाग कहे जाने वाले सूकरखेत पसका में शुक्रवार को आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। लाखों श्रद्धालुओं ने सरयू-घाघरा नदी के संगम में डुबकी लगाई। स्नान-दान व मंदिरों में दर्शन करने के बाद मेले में खरीदारी किया।

सुबह 3 बजे से शुरू हो गया स्नान

पवित्र संगम तट पर स्नान पर्व सुबह करीब तीन बजे से ही प्रारंभ हो गया था। संगम तट पर माह भर से कल्पवास कर रहे संत महात्माओं ने स्नान किया। उसके बाद कल्पवास कर रहे गृहस्थों ने डुबकी लगाई। सुबह सूर्य की किरणें फैलने के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ आना शुरू हो गई। उन्होंने स्नान करने के बाद भगवान वाराह मंदिर में दर्शन किया।

अयोध्या के 84 कोसी परिक्रमा मार्ग में शामिल

अयोध्या धाम की 84 कोसी परिक्रमा में भगवान वाराह की अवतार स्थली शामिल है। यहां संगम तट पर प्रतिवर्ष देश के कोने कोने से साधु, सन्यासी, नागा कल्पवास करने आते हैं। यहां पर संगम तट के बालू की रेत में कुटिया रखकर एक महीने कल्पवास करते हैं। एक माह तक कल्पवास करने के बाद ये साधु-संत प्रयाग के लिए रवाना हो जाएंगे।

रामायण मेले का आयोजन

तुलसी जन्मभूमि न्यास व सनातन धर्म परिषद के संयुक्त तत्वावधान में स्वामी भगवदाचार्य की अगुवाई में रामायण मेला व सूकरखेत महोत्सव का आयोजन हो रहा है। इसमें रामचरितमानस पाठ सीताराम नाम जाप तथा भजन कीर्तन हो रहा है।