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वीडियो : पांडवों ने की थी एशिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना, जानिए शिव के इस मंदिर का रहस्य

महाशिवरात्रि पर्व पर पांडव कालीन ऐतिहासिक पृथ्वीनाथ मंदिर पर सुबह तड़के से ही शिव भक्तों के जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया।

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महाशिवरात्रि पर्व पर पांडव कालीन ऐतिहासिक पृथ्वीनाथ मंदिर पर सुबह तड़के से ही शिव भक्तों के जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया।

एशिया भर में अपनी विराटता के लिए मशहूर शिवलिंग पृथ्वीनाथ मंदिर का अपना एक अलग महत्व है। यहां पर प्रदेश के कोने-कोने से शिवभक्त जलाभिषेक करने के लिए आते हैं।

गोंडा शहर से 30 किलोमीटर दूर खरगूपुर कस्बे के निकट पृथ्वीनाथ मंदिर में भगवान शिव के साक्षात दर्शन होते हैं। मंदिर के महंत ने बताया कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान इस विराटतम शिवलिंग की स्थापना भीम ने किया था। यह शिवलिंग साढ़े 5 फुट ऊंचा है।

एशिया महाद्वीप का सबसे विराटतम शिवलिंग

पृथ्वीनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग एशिया महाद्वीप का सबसे विराटतम शिवलिंग है। प्राचीनतम समय में इस क्षेत्र में पांडव अपनी मां कुंती के साथ रहते थे। इस क्षेत्र के लोग ब्रह्म राक्षस से पीड़ित थे। भीम ने उसका वध कर दिया था। अभिशाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के मार्गदर्शन के बाद भगवान शिव की उपासना के लिए इस विराटतम शिवलिंग की स्थापना किया था।

जमीन के अंदर 64 फीट और ऊपर साडे 5 फीट ऊंचा शिवलिंग

पुरातत्व विभाग की मानें तो एशिया महाद्वीप का सबसे बड़े शिवलिंग है। जिसकी जमीन के अंदर 64 फीट गहराई है। जबकि जमीन के ऊपर साढ़े 5 फीट ऊंचा है। महंत बताते हैं कि खरगूपुर के राजा गुमान सिंह के अनुमति से यहां के पृथ्वी सिंह ने मकान निर्माण के लिए खुदाई शुरू की, उसी रात स्वप्न में पता चला कि जमीन के नीचे सात खंडों में शिवलिंग है। स्वप्न के अनुसार उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया। तभी से इस मंदिर का नाम पृथ्वीनाथ मंदिर पड़ा।

वास्तुकला का बेमिसाल नमूना

श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होने के साथ ही पृथ्वीनाथ मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। मंदिर के पुजारी जगदंबा प्रसाद तिवारी ने बताया कि वैसे यहां तो प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। यद्यपि श्रावणमास व हर तीसरे साल पड़ने वाले अधिमास मे यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। महाशिवरात्रि पर्व और कजलीतीज के अवसर पर यहां की बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को करीब 5 से 6 किलोमीटर तक बैरिकेडिंग करनी पड़ती है।