
यूपी के अमेठी जिले में गोंडा के नफीस ने ठगी करने का एक बहुत बड़ा जाल रचा। लेकिन समय के रहते पोल खुल गई। जिससे एक गरीब परिवार ठगी का शिकार होते-होते बच गया। दरअसल अमेठी जिले के खरौली गांव के रहने वाले रतिपाल का बेटा अरुण 11 साल की आयु में दिल्ली से गायब हो गया था। नफीस नाम का यह जालसाज अरुण बनकर रतिपाल के घर 22 साल बाद पहुंच गया। साधु के भेष में बेटे की शक्ल में पहुंचा अरुण तो पूरा परिवार फफक कर रोने लगा। 22 साल बाद अपने बेटे को पाकर किसी के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जब उसे पता चला कि अरुण ने शादी कर ली है। और उसके पास परिवार भी है। तो बूढ़े बाप की आंखें भर आई।
गोंडा जिले के टिकरिया गांव में मुस्लिम बिरादरी के लोग रहते हैं। इसी गांव में नफीस का भी घर है। नफीस चार भाई है। इसका एक और भाई साधु का भेष रखकर ठगी करते पकड़ा गया था। लोगों की बात पर भरोसा करें तो इस गांव के कई परिवार के लोग साधु का भेष रखकर ठगी का काम करते हैं। नफीस भी ठगी करने के लिए अमेठी जिले के खरौली गांव में पहुंच गया। यहां के रहने वाले रतिपाल का बेटा अरुण 11 साल की आयु में दिल्ली से गायब हो गया था। उसे गायब हुए करीब 22 साल हो गए। नफीस को यह कहानी पहले से ही पता थी। नफीस अरुण बनकर अपने मां-बाप से भिक्षा मांगने पहुंच गया। जब परिवार को यह पता चला कि उनका बेटा साधु हो गया है। परिवार के लोग उसे घर पर रहने के लिए आग्रह करने लगे। तब इसने कहां की हम ऐसे नहीं रख सकते हैं। जिस मठ में हम रहते हैं। हमें अपने गुरु से आज्ञा लेनी पड़ेगी। कथित मठ पहुंचने के बाद घर लौट के लिए यह महाठग फोन करने लगा। उसने बताया कि यहां से हमें लौट के लिए मठ को 10 लाख रुपए देने पड़ेंगे। उसने अपने गुरु से बात कराई।दोनों के बीच तीन लाख 60 हजार में साधू का भेष छोड़ पुत्र की घर वापसी की सहमति बनी।
बेटे को पाने के लिए पिता ने बेच दी 10 बिस्वा जमीन
अरुण की शक्ल में भिक्षा मांग रहे नफीस को पाने के लिए पिता रतिपाल ने अपनी 10 बिस्वा जमीन बेच दी थी। उसे मोबाइल भी खरीद कर बात करने के लिए दे दिया। परिवार के साथ गांव के लोगों ने भिक्षा में करीब 13 कुंतल अनाज दिया। यह अनाज वह पिकअप पर लादकर अयोध्या लाया। उसने बताया कि हमारे गुरु का आदेश है कि अपने गांव और मां-बाप से भिक्षा लेकर आओ तभी तुम्हारा संकल्प पूरा होगा। पिकअप चालक अयोध्या में जिस स्थान पर छोड़कर आया था। पिता रतिपाल के साथ गांव के कुछ लोग अयोध्या गए पिकअप चालक के बताए पते पर उसकी खोजबीन किया। लेकिन वहां कोई नहीं मिला। बाद में परिवार को पता चला की जिसे अरुण समझकर वह अपने घर पर रखने के लिए तैयार थे। वह गोंडा का नफीस है जो साधु के भेष में ठगी का काम करता है। मिर्जापुर में इसके एक और भाई ने साधु बनकर लाखों रुपए का सामान लेकर फरार हो गया था। बाद में पुलिस की पड़ताल में इसकी पोल खुली।
नफीस की मां बोली उसका बेटा जोगी बनकर भिक्षा मांगता है
अमेठी में गोंडा के नफीस का मामला मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद आज पत्रकारों की एक टीम नफीस के गांव टिकरिया पहुंची। पत्रकारों के सवाल के जवाब में नफीस की मां जलीबुन ने बताया कि उसका बेटा नफीस जोगी बनकर फेरी लगता है। भिक्षा मांगता है। कभी-कभी सिलाई का काम भी करता है। जब उसे मीडिया में चल रही फोटो दिखाई गई तो उसने बताया कि यह मेरा बेटा नफीस है। एक सवाल के जवाब में उसकी मां ने बताया कि एक महीने पहले वह घर आया था। इस समय कहां है। इसकी जानकारी उसे नहीं है।
Updated on:
10 Feb 2024 08:52 pm
Published on:
10 Feb 2024 08:08 pm
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