
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
Intro: उत्तर प्रदेश सरकार ने पशुपालकों को बड़ी राहत देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। अब राज्य के हर ब्लॉक में ‘पशु औषधि केंद्र’ खोले जाएंगे। जहां सस्ती और अच्छी गुणवत्ता की दवाइयां उपलब्ध होंगी। ये केंद्र प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की तर्ज पर संचालित होंगे। इस पहल से पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा और पशुओं के इलाज का खर्च कम होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार पशुपालकों के हित में एक नई योजना लेकर आई है। जिसके तहत राज्य के हर विकास खंड (ब्लॉक) स्तर पर ‘पशु औषधि केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों का उद्देश्य पशुपालकों को सस्ती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयां उपलब्ध कराना है। ताकि पशुओं का बेहतर इलाज हो सके। पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाया जा सके।
इन केंद्रों पर लगभग 400 प्रकार की पशु दवाइयां उपलब्ध होंगी। खास बात यह है कि ये दवाइयां बाजार की तुलना में करीब 20 प्रतिशत तक सस्ती मिलेंगी। इससे पशुपालकों पर आर्थिक बोझ कम होगा। और पशुओं के स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलेगा। सरकार ने इन केंद्रों को खोलने के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन करने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं। जैसे कम से कम 120 वर्ग फुट का स्थान होना। फार्मासिस्ट का पंजीकरण और ड्रग लाइसेंस अनिवार्य है।
इस योजना में प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केंद्र और सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी आसानी से इन सेवाओं का विस्तार हो सकेगा। यह पूरी पहल भारत सरकार के ‘पशुधन स्वास्थ्य एवं बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम’ के अंतर्गत संचालित की जा रही है। सरकार का मानना है कि इस योजना से न केवल पशुओं की सेहत बेहतर होगी। बल्कि दूध और अन्य पशु उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन भी बढ़ेगा। कुल मिलाकर, यह योजना पशुपालकों के लिए राहत भरी साबित होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
गोंडा जिला प्रशासन के मुताबिक इस योजना से दोहरी लाभ मिलने की उम्मीद है। एक तरफ पशुपालकों को कम कीमत पर बेहतर गुणवत्ता की दवाइयां उपलब्ध होंगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह योजना भारत सरकार के पशु स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत लागू की जा रही है, जिसका मकसद गांवों में पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाना है। जो लोग पशु औषधि विक्रय केंद्र खोलना चाहते हैं। वे पशुपालन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन शुल्क 5000 रुपये रखा गया है। जो वापस नहीं किया जाएगा। हालांकि आकांक्षात्मक जिलों और विकासखंडों के उम्मीदवारों को फीस में राहत दी जाएगी। केंद्र स्थापित करने के लिए कम से कम 120 वर्गफुट जगह होना जरूरी है। इसके अलावा बी-फार्मा या डी-फार्मा की डिग्री रखने वाला व्यक्ति उपलब्ध होना चाहिए। साथ ही फार्मासिस्ट का पंजीकरण प्रमाणपत्र भी आवेदन के समय जमा करना अनिवार्य होगा।
Published on:
27 Mar 2026 05:54 pm
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