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रोजाना जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं लोग, आजादी के बाद से विकास की बाट जोह रहे क्षेत्र के दर्जन भर गांव

सरकारें लाख विकास का दावा कर लें, लेकिन गोंडा जिले में एक दर्जन से अधिक ऐसे गांव हैं, जहां बल्लियों के सहारे नदी पार करते हैं ग्रामीण
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गोंडा

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Hariom Dwivedi

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Updated: 26 Feb 2018, 6:02 PM IST

gonda itiyathok kuwano river

कैलाश वर्मा
गोंडा. सरकारें भले लाख विकास का दावा कर लें, लेकिन गोंडा जिले में एक दर्जन से अधिक ऐसे गांव अभी भी हैं, जहां के ग्रामीणों को कुआनो नदी पार जाने के लिये लकड़ी की बल्ली का सहारा लेना पड़ता है। जिला मुख्यालय से मात्र 40 किलोमीटर दूर इटियाथोक विकास खंड है। यहां के लोगों को बाजार जाने के लिए बल्लियों का सहारा लेना पड़ता है। पत्रिका के सवाल पर प्रशासन ने जांच कराकर शासन को प्रस्ताव भेजने की बात कही है।

आजादी के 70 साल बाद भी इटियाथोक विकास खंड के गांव विजयगढ़वा, सरकाण्ड, पूरे बसालत, हिन्दू नगर, बरडाण्ड, पूरे मुसद्दी, मध्य नगर, पृथ्वीपाल गंज ग्रन्ट, लखनीपुर, निसारूपुर, मधईपुर, और बलरामपुर के सबलपुर, प्रतापपुर, सवासिंह डिहवा, विजय डिहवा, मान डिहवा और अजब नगर फरेंदा की करीब 50 हजार की आबादी के आवागमन का साधन मात्र बल्लियों का सहारा ही है। बरसात के समय जब नदी उफनाती है तो लोगों पांच किमी की दूरी तय करने के लिए 35 किमी का चक्कर काटकर आते हैं।

विकास खण्ड इटियाथोक के विजयगढ़वा गांव में कुआनो नदी पर बल्लियों का पुल बनाया गया है। गोंडा और बलरामपुर जिले के हजारों ग्रामीण इन्हीं बल्लियों के सहारे नदी पार करते हैं। महिलायें गोद में बच्चा लेकर जहां नदी पार करती हैं, वहीं ग्रामीण साइकिल कंधे पर लादकर बल्ली पर चलते हुए देखा जा सकता है। कभी-कभी तो लोग फिसल कर नदी में भी गिर जाते हैं। उन्हें चोटें भी आती हैं।

जान में जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं ग्रामीण
गोद में बच्चा लेकर बल्ली के सहारे नदी पार कर रही मंजू और कंधे पर साइकिल लादकर नदी पार कर रहे उनके पति का कहना है कि उन्हें मजबूरी में बल्ली के पुल से जाना पड़ रहा है। विजयगढ़वा निवासी जलील कहते हैं कि मजबूरी में इस रास्ते से आना पड़ता है। पानी भर जाने पर 30 से 35 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। चुनाव के दौरान लोग आते हैं और पुल बनवाने का वायदा कर चले जाते हैं। उसके बाद कोई घूमकर देखता नहीं है। नदी पार करते समय गिरकर चोट खाये फरियाद शाह ने बताया कि मैं बलरामपुर गया था खरीदारी करने के लिए वापस आते समय बल्ली से फिसल कर गिर गया, जिससे कपड़े भी भीग गये और मैं भी चोट खाया। यदि इस पुल का निर्माण हो जाये तो हम लोग आसानी से आ जा सकते हैं।

ग्राम प्रधान ने कहा
विजयगढ़वा के ग्राम प्रधान हरदीशउल्लाह खान ने बताया कि यह कुआनो नदी है। इस पर रखे बल्ली के सहारे पच्चीस से तीस गांव के लोग आवागमन करते हैं। बलरामपुर बाजार जाते हैं खरीदारी करने के लिए और रोजी रोटी के लिए भी आते जाते हैं। उस पार के लोग भी इधर नाते रिश्तेदारी में आते जाते है। खान ने बताया कि पच्चीस तीस गांव में पचास से साठ हजार के बीच आबादी है और प्रतिदिन इस बल्ली के सहारे एक हजार लोग 9 बजे रात तक आते जाते रहते हैं।

जिलाधिकारी का बयान
जिलाधिकारी जेबी सिंह ने बताया कि बात संज्ञान में आई है। जांच कराई जायेगी और यदि आवश्यकता होगी तो पुल बनाने की शासन को प्रस्ताव भेजा जायेगा।

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