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स्टेट यूनिवर्सिटी को लेकर गोंडा-बलरामपुर में छिड़ी ‘रार’, 6 विधायक 2 सांसद समेत 8 अधिकारी भी बने पार्टी

स्टेट यूनिवर्सिटी को लेकर गोंडा और बलरामपुर दो जिलों के बीच छिड़ी 'रार' अब न्यायालय के चौखट पर पहुंच गई है। जानते हैं पूरा मामला

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डोमकल्पी में जांच करते तत्कालीन डीएम उज्जवल कुमार

मां पाटेश्वरी राज्य विश्वविद्यालय की मंडल मुख्यालय पर स्थापना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में 6 विधायक दो सांसद सात अधिकारी समेत 16 लोगों को पार्टी बनाया गया है।

मां पाटेश्वरी देवी राज्य विश्वविद्यालय को लेकर दो जिलों में छिड़ी रार अब न्यायालय के चौखट पर पहुंच गई है। जनपद के वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने गोंडा में विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली में जनहित याचिका दायर की है। अधिवक्ता ने दाखिल किए गए जनहित याचिका में जिले के दोनों सांसद, विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों समेत कुल 16 लोगों को पार्टी बनाया है। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना के क्रम में देवीपाटन मंडल को मां पाटेश्वरी देवी राज्य विश्वविद्यालय की सौगात प्रदान की गई है। पिछले फरवरी माह में बजट सत्र में 50 करोड रुपए का आवंटन भी विश्वविद्यालय की स्थापना के मद में किया जा चुका है। इससे पूर्व गोंडा जनपद के विकासखंड- परसपुर स्थित ग्राम पंचायत डोमाकल्पी में विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर शासन स्तर से सर्वे भी कराया जा चुका है। यहां तत्कालीन आयुक्त और जिलाधिकारी द्वारा चिन्हित की गई भूमि का मुआयना भी किया गया था। डोमाकल्पी में उत्तर प्रदेश सरकार के मिल्कियत की 58 एकड़ निशुल्क भूमि उपलब्ध है। राज्य विश्वविद्यालय स्थापना की प्रक्रिया गतिमान थी। इसी दौरान विश्वविद्यालय की स्थापना बलरामपुर जनपद में कराए जाने को लेकर चर्चा तेज हो गई। वहां के जिलाधिकारी के स्तर से जमीन खरीदने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। हालांकि अभी तक बलरामपुर जिले में विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में किसी भी प्रकार का कोई कार्य संपन्न नहीं हो सका है। इसी बीच पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में देवीपाटन मंडल में स्थापित किये जाने वाले विश्वविद्यालय का नामकरण भी सरकार ने मां पाटेश्वरी देवी राज्य विश्वविद्यालय गोंडा के नाम से कर दिया है। हालांकि विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर अभी भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है। जिले के अधिकारी तो इस मामले में कुछ भी बोल नहीं बोल रहे हैं, लेकिन जो चर्चाएं हैं उसमें विश्वविद्यालय बलरामपुर में ही बनाए जाने की बात कही जा रही है। इस दौरान जनपद के वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी की ओर से उच्चतम न्यायालय दिल्ली में जनहित याचिका दायर की गई है। उन्होंने बताया कि जब गोंडा में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए जमीन निशुल्क रूप से उपलब्ध है तो फिर करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग कर डूब क्षेत्र में विश्वविद्यालय को बनाए जाने का क्या औचित्य है।

जनहित याचिका में इनको बनाया गया पार्टी

अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने बताया कि जनहित याचिका में मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार, मानव संसाधन विकास मंत्रालय नई दिल्ली, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली, राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा, मंडलायुक्त देवीपाटन मंडल, जिलाधिकारी गोंडा, जिला अधिकारी बलरामपुर, सांसद गोंडा कीर्तिवर्धन सिंह, सांसद कैसरगंज बृजभूषण शरण सिंह, विधायक करनैलगंज अजय सिंह, विधायक मेहनौन विनय द्विवेदी, विधायक कटरा बाजार बावन सिंह, विधायक मनकापुर रमापति शास्त्री, विधायक तरबगंज प्रेम नारायण पांडेय तथा विधायक गौरा प्रभात कुमार वर्मा सहित कुल 16 लोगों को जनहित याचिका में पार्टी बनाया गया है। श्री त्रिपाठी ने बताया कि गत 10 नवंबर को उनकी ओर से यह जनहित याचिका न्यायालय में दाखिल कर दी गई है। जल्द ही इस पर माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनवाई की जाएगी।