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रक्त का थक्का जमने में तथा हमारे शरीर के लिए क्यों अत्यंत आवश्यक है विटामिन K अपने खाने में करें इन सब्जियों का उपयोग

Vitamins K विटामिन- K वसा में घुलनशील अत्यंत आवश्यक विटामिन हैं इसका रसायनिक नाम फाटोनडाइओन या फाइलोक्विनोन है। विटामिन के हमारे शरीर में ब्लड क्लोटिंग फैक्टर की तरह कार्य करता है।

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Vitamin k

विटामिन K की शरीर में सबसे ज्यादा जरूरत रक्त का थक्का बनाने के लिए होती है। अगर विटामिन K शरीर में न हो तो चोट लगने पर रक्त का थक्का न बनने की वजह से सारा खून शरीर से बाहर निकल जाएगा। विटामिन K हड्डियों को मज़बूत करता है। यह बल्ड प्रेशर को कंट्रोल करने के साथ ही, दिल की बीमारियों से भी महफूज़ रखता है। विटामिन K की कमी की वजह से एनीमिया की बीमारी हो सकती है। शरीर को रोजाना लगभग 90 माइक्रोग्राम विटामिन K लेने की जरूरत होती है। इससे अधिक मात्रा में लेने से खून पतला हो सकता है, जो कि खतरनाक साबित हो सकता है। विटामिन K शरीर में रक्त के प्रवाह को बनाए रखता है। यह रक्त जमने की प्रक्रिया में शामिल जीएलए प्रोटीन, मिनरल और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों को सक्रिय करके शरीर में रक्त का जमाव होने से रोकता है।

विटामिन K के अन्य महत्वपूर्ण फायदे

लीवर में विटामिन- K द्वारा कुछ प्रकार के प्रोटीन्स जैसे - प्रोथ्रोम्बिन तथा फाइब्रिनोजेन का पूर्ण संश्लेषण होता हैं। जो कि, रक्त का थक्का जमाने में सहायक होते हैं। ये संश्लेषित प्रोटीन रक्त में उपस्थित होते हैं, तथा जब शरीर में किसी प्रकार की चोट की स्तिथि उत्पन्न होती है तब, यें प्रोथ्रोम्बिन - थ्रोम्बिन में परिवर्तित होकर रक्त का थक्का जमाते है। ब्लड प्लाज़्मा में घुलनशील प्रोटीन फाइब्रिनोजन पाया जाता है। जो चोट लगने पर, चोटिल स्थान पर थ्रोम्बिन तथा थ्रोम्बोप्लास्टिन के साथ मिलकर फाइब्रीन नामक जाल के समान संरचना बनाती है जिसमें, ब्लड प्लाज़्मा तथा कोशिकाएं फंस जाती है तथा इस प्रक्रिया को ही थक्का बनना कहते हैं। अतः स्पष्ट है कि, विटमिन- K शरीर में दो तरह से काम करता हैं, शरीर के अंदर ब्लड को जमने नहींं देता और शरीर के बाहर ब्लड को बहने नहीं देता। गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए तथा उत्तम स्वास्थ के लिए आवश्यक हैं। स्वस्थ हड्डियों के लिए भी आवश्यक हैं, कैल्शियम के अवशोषण में सहायक हैं।

वृद्धावस्था में हड्डियों की रक्षा के लिए भी ये आवश्यक होतें हैं। विटामिन - K की कमी से पाचन तंत्र से संबंधित परेशानियां उत्पन्न होती है।

विटामिन K के मुख्य स्रोत

यदि बात करें विटामिन के के कुछ मुख्य वनस्पतिक स्रोत गहरे हरे रंग की भाजियाँ, जैसे - सरसों की भाजी, विभिन्न गोभी जैसे - पत्तागोभी, फूलगोभी तथा ब्रोकली , हरी पत्तेदार भाजियाँ, जैसे - पालक, शलजम की पत्तियाँ, सलाद पत्ता, धनिया , सूखे मेवे तथा नट्स जैसे - अंजीर किशमिश, बादाम इत्यादि विटामिन k के शाकाहारी स्रोत है। तथा कुछ अन्य मांसाहारी स्रोत जैसे माँस मछली , यकृत, मटन, अंडे, इत्यादि, इनके अच्छे स्त्रोत हैं। अनाज में ये बहुत कम मात्रा में पाए जाते है। कुछ मात्रा में विटामिन - K शरीर में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया द्वारा भी बनाए जाते हैं।

विटामिन K की कमी से उत्पन्न रोग

रक्त का थक्का जमने का समय बढ़ जाता है। अतः ऐसी स्थिति में यदि चोट लग जाती है तब, अत्यधिक रक्तस्राव हो जाता हैं तथा आंतरिक अंगों में रक्तस्राव की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती हैं, जो जानलेवा साबित हो सकती है।

हल्की चोट लग जाने पर भी, जैसे - मंजन करते समय दाँतों से खून आना तथा नाक फूटने की समस्या देखी जाती है। इनके अभाव में हड्डियाँ नर्म हो जाती हैं तथा टूटने का भय बना रहता है। वृद्धावस्था में हड्डियों की रक्षा के लिए भी ये आवश्यक होतें हैं। विटामिन K की कमी से पाचन तंत्र प्रभावित होता है।