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गोरखपुर में मंदिर पर कब्जा करने का आरोप, मंदिर मामले में हस्तक्षेप करे प्रशासन : सोमेश्वर

गोरखपुर जिले के रामगढ़ताल थानाक्षेत्र में एक मंदिर पर दूसरे पक्ष के लोगों द्वारा कब्जे का आरोप श्री बाला जी मंदिर न्यास के मुख्य न्यासी सोमेश्वर पाण्डेय ने लगाया हैं, उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप करने की भी मांग की है।

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Up news, gorakhpur

फोटो सोर्स: पत्रिका, सोमेश्वर पाण्डेय, मुख्य न्यासी

देवरिया बाइपास के सड़क चौड़ीकरण के क्रम में सड़क पर अतिक्रमण कर बनाये गये मंदिरों को प्रशासन ने अपनी जमीन और अपने संसाधनों से व्यवस्थित करने का सराहनीय कार्य किया। इसी क्रम में देवरिया बाइपास विद्युत उपकेन्द्र के समक्ष एक मंदिर का निर्माण हुआ। इस नवनिर्मित मंदिर भवन में रामपुर तिराहा और भगत चौराहे के अतिक्रमित मंदिर को आना था पर वहां के लोग अपना मंदिर यहां नहीं लाना चाहते थे।

‘राप्ती संस्कृत संगठन न्यास’ के माध्यम से संचालन

ऐसी परिस्थिति में सोमेश्वर पाण्डेय ने विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष से सम्पर्क करके इस मंदिर को ‘राप्ती संस्कृत संगठन न्यास’ के माध्यम से संचालित करने की इच्छा जताई। जी0डी0ए0 ने इस मामले में कुछ भी लिखित देने से इन्कार किया परन्तु मौखिक रूप से मंदिर संचालित करने को अधिकृत इस शर्त के साथ किया कि इस भूमि पर कोई भी स्थाई कार्य नहीं कराया जायेगा।

सोमेश्वर पाण्डेय के प्रयासों से शुरू हुई आरती

इस आश्वासन के बाद मार्च-2025 में श्री सोमेश्वर पाण्डेय ने इस कालोनी और आसपास के लोगों से सम्पर्क करना आरम्भ किया तथा मंदिर भवन में नियमित आरती आदि की प्रक्रिया आसपास और कालोनी वासियों की सहायता से आरम्भ किया।लगभग 20 वर्ष पूर्व स्थापित ‘तारामण्डल नागरिक कल्याण समिति’ के सदस्य और संस्थापक सदस्यों ने भी उत्साहित होकर मदद देना आरम्भ किया।

अयोध्या और जबलपुर से आईं मूर्तियां

रामपुर तिराहा और भगत चैराहे के लोग आने को तैयार नहीं थे और उसकी मूर्तियां भी खण्डित हो गयी थी, ऐसी अवस्था में मंदिर हेतु नये विग्रह को लाने और माँ विन्ध्यवासिनी देवी और बालाजी महाराज के मूर्ति और नर्मदेश्वर भगवान के विग्रह हेतु अपने सहयोगियों के साथ सोमेश्वर पाण्डेय ने क्रमशः अयोध्या और जबलपुर की यात्रा की जिससे मूर्तियों/विग्रह का आगमन इसी मन्दिर प्रांगण में हुआ। इसके लिए जय प्रकाश ओझा, राजकुमार शुक्ला और विश्वेश्वर पाण्डेय ने धनराशि की व्यवस्था की।

अयोध्या के पुजारियों ने की प्राण प्रतिष्ठा

प्राण-प्रतिष्ठा हेतु अयोध्या से पुजारी/पण्डित की व्यवस्था जितेंद्र मणि त्रिपाठी ने किया जिनकी दक्षिणा समिति के कोष से सोमेश्वर पाण्डेय जी द्वारा दी गयी। प्राण-प्रतिष्ठा के पूजन-सामग्री की पूरी व्यवस्था धीरज दूबे एवं सरिता दूबे ने किया। शनि-भगवान की मूर्ति एवं प्राण-प्रतिष्ठा डाॅ0 हेमन्त नायक के प्रयास से हुई।तीन दिन तक चले इस प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में यजमान के रूप में श्री राज कुमार शुक्ल, श्री विश्वेश्वर पाण्डेय, श्री जितेन्द्र मणि त्रिपाठी, श्री अजय शंकर ओझा और डाॅ0 हेमन्त नायक रहे।

सोमेश्वर पाण्डेय द्वारा लगवाए गए बैनर फाड़ दिए गए

अभी तक ठीक-ठाक चल रही व्यवस्था के क्रम में श्री सोमेश्वर पाण्डेय द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा के प्रचारण हेतु छपवाई गई बैनर से समस्या उत्पन्न हो गयी, जिसमें जितेन्द्र मणि त्रिपाठी एवं उनके कुछ समर्थकों ने इस बात पर घोर आपत्ति की। पोस्टर फड़वा दिया कि उस पोस्टर/बैनर पर महन्त योगी आदित्य नाथ जी, मुख्यमंत्री, उ0प्र0, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सदस्य विधान परिषद डा0 धमेन्द्र सिंह, विधायक गोरखपुर ग्रामीण श्री विपिन सिंह, सांसद गोरखपुर श्री रवि किशन शुक्ला, इसी मंदिर के कालोनी के निवासी हैं।

जितेंद्र मणि ने संस्थापक सदस्यों का ही विरोध शुरू कर दिया

इस प्राण-प्रतिष्ठा के बाद जितेंद्र मणि त्रिपाठी एवं उनके सहयोगियों द्वारा संस्थापक सदस्य सोमेश्वर पाण्डेय का मुखर विरोध प्रत्येक स्तर पर किया जाने लगा। मन्दिर जाने पर उन्हे व्यंग द्वारा अपमानित किया जाने लगा। ऐसी स्थिति में सोमेश्वर पाण्डेय एवं अन्य संस्थापक वरिष्ठ कालोनी वासियों ने धीरे-धीरे मन्दिर जाना कम कर दिया या मन्दिर जाना बन्द कर दिया।

"श्री बाला जी मन्दिर न्यास" का गठन

जितेंद्र मणि एवं उनके सहयोगियों के ऐसे कृत्य के बाद सोमेश्वर पाण्डेय ने ‘श्री बाला जी मन्दिर न्यास’ के नाम से एक ट्रस्ट बनाया और उसका रजिस्ट्रेशन कराया। उक्त न्यास का पैन नं0 एलाट कराया और यूनियन बैंक आफ इण्डिया में ‘श्री बाला जी मन्दिर न्यास’ के नाम से एक खाता भी खोला गया, जिससे कोई भी पैसा उनके पास न आकर सीधे बैंक खाते में आवे और सामाजिक पारदर्शिता बनी रहे।

मंदिर पर कब्जा करना चाहता है विरोधी पक्ष

इसी बीच में ‘श्री बाला जी मन्दिर न्यास’ के सदस्यों, पदाधिकारियों जितेन्द्र मणि त्रिपाठी के सहयोगियो द्वारा धमकाया भी जाने लगा जान मॉल की धमकी देते हुवे उनके गुर्गे आरती पात्र से हमला का प्रयास किया । ऐसी धमकी से परेशान होकर दिनांक 27.07.2025 को पूर्वान्ह 11ः30 बजे मंदिर परिसर में एक मीटिंग सोमेश्वर पाण्डेय द्वारा कराई गई। बैठक होते देख जितेन्द्र मणि त्रिपाठी के सहयोगी विरोध करने लगे। वहाँ बैठे लोगों को अपमानित करने लगे और हाथापाई पर उतर गये। पुलिस प्रशासन को बीच-बचाव करना पड़ा। मंदिर पर पूरी तरह कब्जा करना चाहता है।

मंदिर मामले में हस्तक्षेप करे प्रशासन

स्पष्ट है कि जिस नेक-नियति से मन्दिर का निर्माण, पूजा-पाठ शुरू हुआ था, वह अब आपसी द्वेष, रंजिश, मारपीट और थाना-पुलिस तक पहुंच गया है। कालोनी के लोग अब मन्दिर जाने से कतराने लगे हैं। कालोनी वासियों और मंदिर पर स्वस्थ वातावरण देने के लिए प्रशासन का हस्तक्षेप आवश्यक है। हनुमान जी और माता जी का भुगतान सोमेश्वर पाण्डेय ने अपने निजी खाते से किया है।

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