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यूपी के इस टोल प्लाजा की एजेंसी हुई बैन, बिना फास्टैग लगे वाहनों की वसूली में हो रहा था बड़ा खेल

NHAI एनएचएआई के गोरखपुर परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) ने भी जांच की थी। जांच में गड़बड़ी की पुष्टि के बाद नयनसर टोल प्लाजा की संचालक एजेंसी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। साथ ही एजेंसी को काली सूची में डालने के लिए मुख्यालय को संस्तुति की गई थी।

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देश के कई राज्यों में टोल प्लाजा पर वसूले जाने वाले टैक्स में घोटाले को लेकर STF ने 22 जनवरी को कई स्थानों पर छापा मारा था, इस छापेमारी में गोरखपुर जिले के नयनसर टोल प्लाजा में भी गड़बड़ी मिली थी। इसके बाद NHAI के गोरखपुर परियोजना क्रियान्वयन इकाई (PIU) ने भी जांच की थी। जांच में गड़बड़ी की पुष्टि के बाद नयनसर टोल प्लाजा की संचालक एजेंसी पर दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।साथ ही एजेंसी को काली सूची में डालने के लिए मुख्यालय को संस्तुति की गई थी।

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बिना फास्टैग वाले वाहनों से वसूली का खेल

नयनसर टोल प्लाजा पर बिना फास्टैग वाले वाहनों से टैक्स जमा कराने में खेल हो रहा था। विशेष साफ्टवेयर से वसूली की जाती थी। उसकी प्रिंट पर्ची NHAI के साफ्टवेयर से मिलने वाली पर्ची के समान ही होती थी। इससे किसी को भी संदेह नहीं होता था। बिना फास्टैग वाले वाहनों से लिए गए टोल कर की औसतन पांच प्रतिशत धनराशि NHAI के असली साफ्टवेयर से वसूली जाती थी, ताकि किसी को शक न हो। बिना फास्टैग वाले वाहनों से लिया गया कर सरकारी खजाने में नहीं जा रहा था।

साफ्टवेयर के जरिये पूरा खेल

नियमानुसार बिना फास्टैग वाले वाहनों से वसूले जाने वाले टोल कर का 50 प्रतिशत NHAI के खाते में जमा करना होता है। टोल प्लाजा पर कर वसूली में घोटाले का मामला पकड़ में आने के बाद STF ने निगरानी शुरू की थी। पता चला कि जिस साफ्टवेयर के जरिये पूरा खेल हो रहा है, उसे बनाने और इंस्टाल करने वालों की सूची में गोरखपुर के नयनसर टोल प्लाजा का भी नाम था। इसी आधार पर STF ने कार्रवाई की थी। NHAI के परियोजना निदेशक, ललित प्रताप पाल ने बताया कि एजेंसी को दो साल के लिए काली सूची में डाल दिया गया है। नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही नई एजेंसी काम शुरू कर देगी।


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