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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अब अंकपत्रों व डिग्रियों की आॅनलाइन रखरखाव होगा। इनका आॅनलाइन सत्यापन भी हो सकेगा।
इस सुविधा के लिए नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी योजना के अंतर्गत सीडीएसएल वेंचर्स लिमिटेड (सीवीएल) के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया गया।
कुलपति प्रो. विजयकृष्ण सिंह ने बताया कि विवि मौजुदा सत्र से ही फाइनल ईयर के विद्यार्थियों के अंकपत्र और डिग्री ऑनलाइन कर देगा।
विवि की ओर से एमओयू पर परीक्षा नियंत्रक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने तथा सीवीएल प्रतिनिधि देवेश दुबे, कुलसचिव शत्रोहन वैश्य तथा नैड के नोडल अधिकारी प्रो विजय कुमार ने हस्ताक्षर किए।
’राष्ट्रीय अकादमिक डिपॉजिटरी (एनएडी)’
भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली लगभग 55 स्कूल बोर्डों, 359 राज्य विश्वविद्यालयों, 123 डीम्ड विश्वविद्यालयों, 47 केंद्रीय विश्वविद्यालयों और 260 निजी विश्वविद्यालयों के साथ जुड़ी हुई प्रणाली है। इसके अलावाIISc / IITs / IIMs / NITs / IISERs / IIITs / NITIE और 12 अन्य केंद्रीय वित्त पोषित संस्थानों जैसे 107 अन्य संस्थान हैं। ये संस्थान नियमित रूप से मार्कशीट , डिप्लोमा और प्रमाण पत्र आदि प्रदान करते हैं। जो लोग नौकरी में प्रवेश कर रहे हैं उन्हें अपने अकादमिक प्रमाण पत्रों की पहुंच, पुनर्प्राप्ति और सत्यापन के लिए एक विश्वसनीय, प्रामाणिक और सुविधाजनक तंत्र की आवश्यकता होती है। छात्र अक्सर अपने प्रमाण पत्र की प्रतियां जब खो देते हैं या वे नष्ट होते हैं तो उन्हें फिर से बनवाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ’डिजिटल डिपॉजिटरी में अकादमिक प्रमाण पत्र रखने से शैक्षिक संस्थानों, छात्रों और नियोक्ताओं को ऑनलाइन डिजीटल अकादमिक सर्टिफिकेट्स मुहैया होंगे और फर्जी प्रमाण-पत्र और मार्क-शीट बनाने की धोखाधड़ी पर भी रोक लगेगी।’
उद्देश्य
राष्ट्रीय अकादमिक डिपॉजिटरी (एन ए डी) का उद्देश्य विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों द्वारा जारी इन शैक्षणिक प्रमाण पत्रों एवं अभिलेखों के ऑनलाइन लॉजिंग, सत्यापन और प्रमाणीकरण के लिए एक विश्वसनीय और सुविधाजनक तंत्र उपलब्द्ध कराना है। राष्ट्रीय अकादमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) शैक्षिक संस्थानों/बोर्डों/पात्रता मूल्यांकन निकायों द्वारा व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराए गये डिजीटल अकादमिक प्रमाणपत्र, डिप्लोमा, डिग्री, मार्क-शीट आदि का 24Û7 ऑनलाइन स्टोर हाउस है। एनएडी न केवल अकादमिक प्रमाणपत्रों के लिए आसान पहुंच और पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित करता है बल्कि इसकी पुष्टि या सत्यापन का काम भी करता है और साथ ही इसकी प्रामाणिकता और सुरक्षित रखरखाव की गारंटी देता है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 27 अक्टूबर, 2016 को आयोजित अपनी बैठक में प्रतिभूति डिपॉजिटरी के पैटर्न पर राष्ट्रीय अकादमिक डिपोजिटरी (एनएडी) स्थापित करने की मंजूरी दी थी। सरकार ने इसके लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) को एक अधिकृत संस्था के रूप में नामित किया है। यूजीसी ने एनएएसडीएल डाटाबेस मैनेजमेंट लिमिटेड (एनडीएमएल) और सीडीएसएल वेंचर्स लिमिटेड (सीवीएल) के साथ एनएडी के संचालन के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। अकादमिक संस्थान/बोर्ड/पात्रता मूल्यांकन निकायों को एनएडी की सेवाओं के उपयोग के लिए कानूनी तौर पर लागू करने योग्य समझौते में प्रवेश करने के लिए दो डिपॉजिटरों में से किसी एक का चयन करना आवश्यक है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विवि ने सीवीएल का चयन किया है।
’एनएडी के लाभ’
’शैक्षिक संस्थानों के लिए’
सभी अकादमिक प्रमाण पत्रों को रखने का स्थायी और सुरक्षित ऑनलाइन स्टोर
डुप्लिकेट प्रमाण पत्रों के लिए अब भटकने की बजाय छात्र इसे सीधे एनएडी से ही प्राप्त कर सकते हैं
नकली और जाली प्रमाण पत्रों पर प्रभावी रोकथाम
’विद्यार्थियों के लिएः’
अकादमिक संस्थान द्वारा अपलोड अकादमिक प्रमाण पत्रों की तत्काल उपलब्धता
प्रमाण पत्रों का ऑनलाइन, स्थायी रिकॉर्ड
सर्टिफिकेट खोने, खराब होने और नष्ट होने का कोई खतरा नहीं है
अपने प्रमाण पत्रों तक कभी भी, कहीं भी सुविधाजनक पहुंच
राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणपत्रों की प्रतियों के प्रमाणीकरण की आवश्यकता समाप्त
’सत्यापन उपयोगकर्ताओं (नियोक्ता कंपनियों, बैंक आदि) के लिए’
प्रमाण पत्रों का ऑनलाइन, त्वरित और विश्वसनीय सत्यापन संभव
सर्टिफिकेट्स की प्रमाणित प्रतिलिपि तक पहुंच
नकली और जाली प्रमाणपत्रों का कोई जोखिम नहीं।
सत्यापन में लागत, समय और कठिनाइयों में कमी
Published on:
24 Feb 2018 01:01 am
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