scriptभीषण नरसंहार में उड़े थे पिता ओमप्रकाश पासवान के चीथड़े…बेटा बना मोदी 3.0 में मंत्री | Father Om Prakash Paswan was blown to pieces in a horrific massacre incident…Son became a minister in Modi 3.0 | Patrika News
गोरखपुर

भीषण नरसंहार में उड़े थे पिता ओमप्रकाश पासवान के चीथड़े…बेटा बना मोदी 3.0 में मंत्री

नरेन्द्र मोदी सरकार 3.0 में पहली बार मंत्री बनने वालों में यूपी की बांसगांव (सुरक्षित) संसदीय सीट से चौथी बार चुने गए कमलेश पासवान भी हैं। उन्होंने राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राजनीति इनको विरासत में मिली है, इनके पिता स्वर्गीय ओमप्रकाश पासवान भी विधायक थी। बदकिस्मती से इनके पिता की 1996 के लोकसभा चुनावी सभा के दौरान भयानक हमले में हत्या कर दी गई थी। यह नरसंहार यूपी का अब तक पहला नरसंहार है जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे। उस दौर में इस नरसंहार ने लोगो को झकझोर कर रख दिया था।

गोरखपुरJun 10, 2024 / 04:40 am

anoop shukla

उत्तर प्रदेश की बांसगांव लोकसभा सीट से लगातार चौथी बार चुनाव जीते कमलेश पासवान को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। पासवान को यूपी में बड़े दलित चेहरे के तौर पहचाना जाता है।वे बांसगांव लोकसभा सीट से 2009 से लगातार जीत रहे हैं। उनकी मां सुभावती पासवान भी पूर्व में सांसद रह चुकी हैं।
साल 1996 के दौरान यूपी में लोकसभा चुनाव की तैयारियां चल रही थीं। शहरों से लेकर गांवों तक में जनसंपर्क और सभाएं हो रही थीं। 25 मार्च 1996 की रात करीब सात बजे गोरखपुर के बांसगांव में माल्हनपार रोड पर सपा प्रत्याशी ओम प्रकाश पासवान की जनसभा थी। ओम प्रकाश गोरखपुर की तत्कालीन मानीराम विधानसभा सीट से तीसरी बार विधायक थे। जनसभा में ट्रॉलियों को जोड़कर मंच बनाया गया था। तीन हजार से ज्यादा की भीड़ थी। आलम यह था कि जनसभा स्थल के पास जिला पंचायत की दुकानों की छतों तक पर लोग बैठे थे। जनसभा को संबोधित करने के बाद ओम प्रकाश ने जैसे ही मंच से नीचे उतरने के लिए सीढ़ी पर पैर रखा, तेज धमाका हुआ। यह एक बम था जो ओम प्रकाश पर फेंका गया था। हमले में सिर धड़ से अलग होने से ओम प्रकाश पासवान की मौके पर ही मौत हो गई।
पहले धमाके के बाद लोगों के कुछ समझने से पहले ही जनसभा स्थल दर्जनों बमों के धमाकों से दहल गया। वीभत्स घटना को अंजाम देने के बाद हमलावर मंच के करीब पहुंचे। मृतकों और घायलों में ओम प्रकाश पासवान, उनके साथियों और गनर को तलाशा। मौत की पुष्टि के बाद मौके पर पड़ी पिस्टल और राइफल उठाकर हमलावर दो बाइकों से फरार हो गए। चंद मिनट पहले नारों से गूंज रहे जनसभा स्थल पर देखते ही देखते धुएं और चीखें सुनाई पड़ रही थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने गंभीर रूप से जख्मी 30 लोगों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमले में कई लोगों के शरीर के चीथड़े उड़ गए थे। पूरी जनसभा स्थल पर जूते-चप्पल फैले थे। धमाकों से उड़े लोगों के कपड़े बिजली के तारों तक पर पड़े थे। हमले में तत्कालीन विधायक ओम प्रकाश पासवान, उनके करीबी इनाम उल्लाह, मरवटिया निवासी रामेश्वर सिंह, अधिवक्ता वली उल्लाह, बांसगांव निवासी सुन्दर पासी की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि बांसगांव निवासी अली हुसैन और कौड़ीराम निवासी अभिचंद्र यादव ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ा था।
रिटायर्ड आईपीएस राजेश पाण्डेय बताते हैं कि यूपी के इतिहास में राजनेताओं पर हमले की घटनाएं तो बहुत हुईं, लेकिन इस तरह जनसभा में बमों से हमला कर नेता और उनके समर्थकों की हत्या जैसी घटना न पहले हुई थी और न ही उसके बाद हुई। बकौल, राजेश पाण्डेय इस तरह के हमले की घटना का एक ही उदाहरण सामने आता है, जिसमें पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की बिहार में जनसभा के दौरान बमों से हमला कर हत्या की गई थी। घटना को लेकर हमले में मारे गए पासवान के करीबी रामेश्वर सिंह के चाचा राम सेवक सिंह ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ घटना की एफआईआर दर्ज करवाई थी।

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