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डीएम राजीव रौतेला नहीं अब कमिश्नर राजीव रौतेला

  उपचुनाव में काउंटिंग अपडेट नहीं जारी करने पर सुर्खियों में आने वाले डीएम राजीव रौतेला को देवीपाटन कमिश्नर नियुक्त किया गया

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dm rajeev rautela

गोरखपुर। आखिरकार जिलाधिकारी गोरखपुर राजीव कुमार रौतेला का स्थानांतरण कर दिया गया। उपचुनाव सहित कई मामलों में सरकार की किरकिरी कराने वाले रौतेला का प्रभाव कम नहीं हुआ है। उनको जिले से हटाकर अब कमिश्नरी का चार्ज दे दिया गया है। रौतेला देवीपाटन मंडल के कमिश्नर बनाए गए हैं। रौतेला की जगह कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के.विजयेंद्र पांडियान गोरखपुर के नए जिलाधिकारी होंगे।
शुक्रवार की देर रात में प्रदेश के 37 आईएएस अधिकारियों के ट्रांसफर की लिस्ट जारी हुई। हालांकि, बीजेपी के चुनाव हारने और काउंटिंग में उनके रवैये से यह चर्चा तो थी कि रौतेला का गोरखपुर से जाना तय है लेकिन उनको मंडल का प्रभार मिल जाएगा इसकी आशा कोई नहीं कर रहा था।
गोरखपुर के डीएम रहे राजीव रौतेला का दस महीना का कार्यकाल काफी विवादों से भरा रहा। हाईकोर्ट उनको कई बार हटाने का निर्देश दे चुका था लेकिन सरकार उनको हटाने से परहेज करती रही। यही नहीं,
भारत सरकार ने जब उत्तराखंड कैडर के अधिकारियों को वापस करने का पत्र जारी किया तो उस लिस्ट में भी रौतेला का नाम था लेकिन उन पर सरकार मेहरबान रही। यही नहीं तमाम ऐसे प्रकरण आए जब खुद भाजपा के कई नेता और तमाम कार्यकर्ताओं ने डीएम के खिलाफ मोर्चा खोला लेकिन उनको सुनने की बजाय जिम्मेदारों ने अपने अधिकारी पर अधिक भरोसा जताया। उपचुनाव में मिली भाजपा को हार के बाद बहुत सारे भाजपाई हार की एक वजह अधिकारियों को भी मान रहे थे जिसमें डीएम भी थे। भाजपाइयों के इस गुस्से को देखते हुए माना जा रहा था कि राजीव रौतेला को बेहद कम प्रभावी विभाग में भेजा जाएगा लेकिन देवीपाटन मंडल का मंडलायुक्त बनने के बाद यह तो साफ है कि रौतेला पर अभी भी सरकार का भरोसा कम नहीं हुआ है।

उपचुनाव में काउंटिंग अपडेट में देरी करने पर फजीहत

गोरखपुर उपचुनाव में डीएम राजीव कुमार रौतेला की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। काउंटिंग की करीब नौ राउंड पूरा होने के बाद भी उनकी तरफ से पहले राउंड तक का डिटेल जारी नहीं करने से सवाल उठने लगे थे। पत्रिका ने सबसे पहले इस गड़बड़ी की खबर प्रकाशित की और जिम्मेदारों को अवगत कराया। खबरें सामने आने के बाद विधानसभा में हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष एकजुट होकर राज्य निर्वाचन आयोग तक पहुंचा। विधानसभा में धरना शुरू हो गया। इसके बाद आयोग सक्रिय हुआ। प्रेक्षक डाॅ.माधवी खुद गणना स्थल पर पहुंची। सारी रिपोर्ट ली। इसके बाद जानकारी सामने आने लगी। परिणाम सामने जब आया तो पता चला कि बीजेपी पिछड़ चुकी है।