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Video गोरखपुर महोत्सव बनाम बीआरडी आक्सीजन कांडः था इंतजार जिसका ये वो सहर तो नहीं

सोशल मीडिया में भी गोरखपुर महोत्सव के आयोजन पर हो रहा कटाक्ष

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गोरखपुर। सैफई महोत्सव पर कभी समाजवादी सरकार को घेरने वाली भाजपा सरकार अब गोरखपुर महोत्सव के आयोजन पर विपक्ष के निशाने पर है। बीआरडी मेडिकल काॅलेज में आक्सीजन कांड और इंसेफेलाइटिस से हो रही मौतों को लेकर अब विपक्ष इस आयोजन को मुद्दा बनाकर हमलावर है।
बीते साल में अगस्त महीने का पहला सप्ताह गोरखपुर पूरे देश में सुर्खियों में रहा था। महज साठ लाख रुपये का आक्सीजन खरीदी का भुगतान बकाया था। सप्लायर सभी जिम्मेदारों को इस बाबत अवगत कराता रह गया। लेकिन प्रशासन से लेकर शासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। सप्लायर ने भी मासूम जिंदगियों की परवाह किए बगैर सप्लाई रोक दी। यह आजाद भारत का काला सच था। आक्सीजन की खातिर तड़प-तड़प कर तीन दर्जन से अधिक मासूम मर गए। दर्जनों मांओं की कोख उजड़ गई। फिर भी सरकार की तंद्रा न टूटी। यह मुद्दा गरमाया। शासन और सरकार पहले बचाव में उतर आई। सरकार के प्रवक्ता व सीनियर मिनिस्टर सिद्धार्थनाथ सिंह ने अपना दामन बचाने के लिए यहां तक कह दिए कि अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं। हालांकि, देश-विदेश की मीडिया में आक्सीजन की सप्लाई बाधित होने से बच्चों की मौत जब मुद्दा बना तो सरकार को होश आया। उसने आनन फानन में जांच कमेटी गठित की। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन प्राचार्य सहित नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर हुआ। लेकिन जिनके घरों का चिराग बुझ गया वे तो अभी भी गम में डूबे हुए हैं। उधर, इंसेफेलाइटिस रूपी काल का खूनी पंजा भी हर बार की तरह इस बार भी कहर बरपाता रहा। बीआरडी मेडिकल काॅलेज में व्यवस्थागत खामियां सरकार दूर करने में विफल रही। धन की कमी भी आड़े आती रही।
विपक्ष का आरोप कि अभी छह माह भी नहीं बीता कि सरकार ने गोरखपुर महोत्सव को बेहद भव्य मनाने का फैसला ले लिया। कम से कम उन बच्चों को तो याद कर लेना चाहिए था।
समाजवादी पार्टी का कहना है कि जिस सैफई महोत्सव को भाजपा कोसती थी अब उसी का नकल कर रही। अब उसे बताना चाहिए कि यह फिजूलखर्जी है या नहीं।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

सोशल मीडिया पर भी गोरखपुर महोत्सव का जमकर कटाक्ष किया जा रहा। एक चर्चित रिटायर्ड आईएएस ने लिखा है कि अबकी बार गोरखपुर में होगा सैफई महोत्सव....स्थान बदला है लेकिन भव्यता वही रहेगा। आगे उन्होंने लिखा है कि बजट के अभाव में स्वेटर वितरण के वादे को जैसे लकवा मार गया है लेकिन महोत्सव के नाम पर करोड़ों के वारे न्यारे करने पर तुले हैं भ्रश्ट अफसरशाह। आलू उत्पादक किसानों की खस्ता हालत व ठंड से सैंकड़ों गरीब गुरबाओं की मौत का जश्न बनेगा गोरखपुर में। इस मुद्दे पर रिटायर्ड आईएएस सूर्य प्रताप सिंह की लंबी चैड़ी पोस्ट को कई आईएएस-आईपीएस के अलावा काफी लोगों ने शेयर किया है।


बहरहाल, फैज की यह चंद लाइनें बेहद मौजूं है...

ये दाग दाग उजाला, ये शबगजीदा सहर
वो इन्तजार था जिस का, ये वो सहर तो नहीं

ये वो सहर तो नहीं जिस की आरजू लेकर
चले थे यार

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