
देवरिया में छह लाशें गिरने के बाद जागे अफसर, ADG ने जोन में लागू किया
Gorakhpur : जिले में हुए नरसंहार के बाद अफसरों की भी नींद टूटी, कई मामलों में मातहतों की हीलाहवाली से अधिकारियों तक सही प्रार्थना पत्र नही पहुंच पाते जिससे की छोटी चीजें भी बड़े स्तर पर घटना को अंजाम दे दे रही हैं। इसको देखते हुए गोरखपुर जोन के ADG अखिल कुमार ने जोन के 11 जिलों में '' ऑपरेशन 117" लागू किया है।
जानिए क्या है "ऑपरेशन 117"
बस्ती में चल रहे इस अभियान से एक भी विवाद सामने न आने पर इसकी सफलता देखते हुए एडीजी ने जोन के 11 जिले के ऑपरेशन 117 लागू कर दिया है। इस अभियान के तहत पुलिस पांच साल के पुराने आईजीआरएस और अन्य माध्यमों से आए जमीन विवादों का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार करेगी। विवादित व्यक्ति की सूची तैयार करने के बाद पाबंद और जब्तीकरण की रिपोर्ट प्रशासन को भेजेगी। एडिशनल एसपी व सीओ रैंक के अफसर प्रशासनिक अफसरों से तालमेल कर पाबंदी का आदेश कराएंगे।
धारा 117 के बाद नहीं हुई हिंसा की कोई घटना
एडीजी ने बताया कि अब तक की समीक्षा से पाया गया कि पुलिस धारा 107 की रिपोर्ट तो कई मामलों में भेजती है पर परंतु धारा 117 की कार्रवाई पूरी न होने से पाबंद करने के लिए दिए गए आदेशों की संख्या लगभग शून्य है। बताया कि बस्ती परिक्षेत्र द्वारा एक प्रयोग के तहत अभियान चलाकर समीक्षा की गई तो यह पाया गया कि जिन मामलों में 117 यानी पाबंदी का आदेश जारी हो गया है, उन मामलों में हिंसा की कोई घटना नहीं हुई।
रिपोर्ट ही नहीं पाबंद का आदेश भी जारी कराएगी पुलिस
एडीजी अखिल कुमार ने बताया कि पुलिस की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय आठ में परिशांति कायम करने व सदाचार का प्रावधान है। इसका इस्तेमाल अब पुलिस करेगी और विवादित मामलों की सूची तैयार करेगी। एडीजी के मुताबिक, पुलिस ऐसे मामलों में 107 के तहत रिपोर्ट तैयार कर भेजेगी और विभिन्न प्रक्रियाओं का अनुपालन करने के बाद धारा 117 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट से पाबंदी का आदेश जारी कराएगी।
31 अक्तूबर से चलेगा "ऑपरेशन 117" का दूसरा चरण
31 अक्टूबर के बाद द्वितीय चरण का अभियान चलेगा। इसके अंतर्गत पुलिस द्वारा प्रेरित रिपोर्ट पर एसडीएम कोर्ट से समयबद्ध कराई करानी होगी। ताकि 15 दिनों में समस्त प्रकरणों की सुनवाई हो जाए। छह महीने ही पुलिस के रिपोर्ट की समय अवधि होती है, अगर इस दौरान कार्रवाई नहीं हुई तो फिर खुद समाप्त हो जाती है। पाबंद किए जाने की धनराशि व्यक्ति की हैसियत से अनुसार भारी धनराशि से पाबंद किया जाए। कम से कम पांच लाख से पाबंद किया जाएगा। विवाद से संबंधित किसी पक्ष के पास यदि लाइसेंस असलहा है और इस विवाद के परिपेक्ष में उसके दुरुपयोग की आशंका है इसके निरस्तीकरण की रिपोर्ट भी पुलिस भेजेंगी।
5 लाख रुपए से होंगे पाबंद
देवरिया कांड के बाद जमीन से जुड़े विवाद को रोकने के लिए हर स्तर पर सख्ती शुरू हो गई है। गोरखपुर जोन में अब बीट सिपाही ऐसे विवादों की सूची बनाएंगे और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ न सिर्फ 107 (शांतिभंग की आशंका) की रिपोर्ट न सिर्फ मजिस्ट्रेट को देंगे बल्कि कार्रवाई पूरी कराकर पाबंदी का आदेश भी जारी कराएंगे।कम से कम पांच लाख रुपये से पाबंद किया जाएगा। अगर पाबंदी की शर्त टूटती हैं तो पैसे की वसूली होगी।पाबंदी की अवधि छह महीने तक होती है, ऐसे में अफसरों को इस दौरान विवाद को निस्तारित करना होगा।
पुलिस को सौंपी गई बिंदुवार जिम्मेदारी
1 -बीट उप निरीक्षक/बीट पुलिस अधिकारी पिछले पांच साल में आईजीआरएस के माध्यम से दिए गए समस्त प्रार्थना पत्रों का विश्लेषण करेंगे, जिसमें अभी भी विवाद हो।
2-आईजीआरएस के अतिरिक्त प्रधान, पूर्व प्रधान, अन्य संभ्रांत लोगों, लेखपाल, ग्राम प्रहरी आदि से मामलों की जानकारी लेंगे। इसी आधार पर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
3-ध्यान रखा जाएगा कि रिपोर्ट में किसी नाबालिग को न शामिल कर लिया जाए। रिपोर्ट बीट उप निरीक्षक और फिर थानेदार सत्यापित करेंगे। फिर एसडीएम को भेजा जाएगा।
4 -अक्तूबर तक सभी मामलों की समीक्षा रिपोर्ट भेजनी होगी। इसके बाद बीट पुलिस अधिकारी, बीट उप निरीक्षक को प्रमाण पत्र देंगे कि उनके इलाके में समस्त प्रकरणों को चिन्हित कर 107 की रिपोर्ट भेजी गई है।
5-सीओ, एसडीएम से वार्ता कर कोर्ट में चल रहे विवाद की सूची तैयार करेंगे। इसके बाद कार्रवाई के लिए कमिश्नर और डीएम से समन्वय स्थापित करेंगे।
Published on:
08 Oct 2023 09:27 am
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