जाड़ा की शुरूआत होते ही सफर करने वालों की दिक्कतें भी प्रारंभ हो जाती है। रात में पड़ने वाला कोहरा इन सब परेशानियों का सबसे बड़ा सबब होता है। आलम यह कि कोहरा की वजह से फ्लाइट्स कैंसिल तो होती ही हैं ट्रेनों की गति भी कम होने के साथ कई बार कैंसिल करना होता है। हालांकि, कोहरा में भी प्रभावी तरीके से ट्रेनों (Trains) के संचलन के लिए तमाम तरह के तकनीकों को अपनाया जा रहा लेकिन दशकों पहले का नुस्खा आज भी कोहरा (Fog) में ट्रेनों के संचालन के लिए सबसे अचूक माना जाता है। आज भी कोहरा के दिनों में ट्रेनों को चलाने के लिए चालक सबसे अधिक विश्वास चूना और पटाखा पर करते हैं। हालांकि, इसके लिए अलग से कोई बजट रेलवे (Indian Railway) अलाॅट नहीं करता फिर भी अपने अपने सेक्शन में रेलवे स्टाॅफ ठंडा के पहले चूना की मार्किंग शुरू कर देता है।