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आधुनिक गणित व विज्ञान आर्यीाट्ट के शून्य पर ही टिका

आर्यभट्ट सेवा समिति ने जयंती पर आर्यभट्ट को याद किया

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aryabhatt jayanti

गोरखपुर। सम्राट चंद्रगुप्त के नवरत्नों में शुमार रहे महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट की जयंती शुक्रवार को सम्मानपूर्वक मनाई गई. आर्यभट्ट सेवा समिति की ओर से महानगर के सुभाष चन्द्र बोस नगर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सुभाष शर्मा ने कहा कि देश के प्रथम उपग्रह का नाम इस महान गणितज्ञ के नाम पर रखा गया है. आर्यभट्ट ने इस दुनिया को जो ज्ञान का भंडार दिया है उसकी उपयोगिता और उपयुक्तता आज भी है.
मुख्यवक्ता सतीश शर्मा ने कहा कि आर्यभट्ट ने गणित की मूल अवधारणाओं का विकास किया. उनके आधार पर खगोल विज्ञान के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल हुई है. उनकी देन शून्य के बिना आधुनिक गणित और विज्ञान की कल्पना तक नहीं की जा सकती है.
विशिष्ट अतिथि पौहारी शरण मिश्रा ने कहा कि महान गणितज्ञ आर्यभट्ट द्वारा रचित ग्रन्थ आर्यभट्टम विश्र्व की अमूल्य धरोहर हैं. उन्होंने गणित और खगोलशास्त्र के क्षेत्र में विश्वसनीय कार्य किए. हम सभी को ऐसे महान पुरुष के दिव्य ज्ञान से रूबरू होकर समाज को गौरवान्वित करना होगा.
कार्यक्रम के संयोजक गजेन्द्र भट्ट ने कहा कि आर्यभट्ट का जन्म 476 ई. में गोदावरी और नर्मदा नदी के मध्य अशमाका नामक स्थान पर हुआ था. त्रिकोणमिति के इस जनक ने ही पाई का दशमलव के बाद चार अंकों तक मान निकाला था.
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रभाकर शर्मा ने कहा कि आर्यभट्टीयम नामक पुस्तक के माध्यम से पहली बार शून्य का उपयोग बताया था, जो गणित की मूल पुस्तक मानी जाती है. सूर्य और चन्द्र ग्रहण का वैज्ञानिक कारण भी इसी महान मनीषी ने बताया था.
शिवकुमार शर्मा, डॉ. शशिभूषण शर्मा, शिवशंकर शर्मा, धीरेन्द्र भट्ट, अविनाश भट्ट, धर्मेन्द्र भट्ट, प्रभुनाथ शर्मा, कुमोद चंद्र शर्मा, अभिषेक भट्ट सहित ब्रह्मभट्ट समाज के लोगों ने अपने विचार लोगों के बीच रखे.
इसके पूर्व जगदीश शर्मा ने मां सरस्वती और आर्यभट्ट की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया. कार्यक्रम का संचालन अनिल भट्ट ने किया. अध्यक्ष प्रभाकर शर्मा ने आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापन किया.