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निषाद वोटबैंकः भाजपा तोड़ने को बेचैन तो समाजवादी पार्टी सहेजने में परेशान

निषाद वोटबैंक की सेंधमारी से तय होगा किसके सिर बंधेगा जीत का सेहरा।

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गोरखपुर। संसदीय क्षेत्र गोरखपुर में उपचुनाव का राजनैतिक तापमान अपने शबाब पर है। राजनैतिक दल अपनी बिसात बिछाकर शह-मात के खेल में जुट गए हैं। सब जीत का दावा कर रहे हैं। लेकिन जीत के तुरूप का पत्ता अभी भी निषाद वोटरों के पास है। निषाद वोटर का बिखराव व एका से ही तय होगा कि जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा। हालांकि, सपा व बीजेपी निषाद मतों को हासिल करने के लिए अपनी तरकस से तीर चला चुके हैं। फिलहाल, 14 मार्च का परिणाम तय करेगा कि किसकी रणनीति सफल हुई और कौन बिसात बिछाता ही रह गया।
गोरखनाथ मंदिर के प्रभाव क्षेत्र वाले गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में करीब चार लाख निषाद मतदाता हैं। निषाद बाहुल्य इस क्षेत्र में गोरखनाथ मंदिर का अधिक प्रभाव रहा है। यही वजह रहा कि गोरखनाथ मंदिर से या इस पीठ का आशीर्वाद पाकर जो भी चुनाव लड़ा उसके सिर पर जीत का सेहरा बंधता रहा। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि निषाद समाज का वोट काफी संख्या में गोरखनाथ मंदिर के समर्थन वाले कैंडिडेट को ही मिलता रहा है।
यह आस्था का ही मामला रहा है कि गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ के खिलाफ निषाद समुदाय के कद्दावर नेता रहे जमुना निषाद के ताल ठोकने के बावजूद इस समाज का काफी वोट मंदिर को ही मिला। यही नहीं भले ही निषाद समाज का वोट अन्य क्षेत्रों में बसपा का वोट माना जाता रहा लेकिन गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में यह वोट भाजपा प्रत्याशी को ही मिला है।
लेकिन योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने और गोरखनाथ मंदिर से किसी प्रत्याशी के नहीं होने से इस वोट को लेकर भाजपा के माथे पर चिंता की लकीर खिंचनी शुरू हो गई है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने इस वोटबैंक को एकमुश्त अपने पाले में करने के लिए निषाद दल के अध्यक्ष डाॅ.संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को अपने सिंबल पर चुनाव मैदान में उतार विरोधी दलों के पेशानी पर बल ला लिया है। जानकार बताते हैं कि डाॅ.संजय निषाद अपने समाज में काफी लोकप्रिय व मान्य नेता हैं। समाजवादी पार्टी का मूल वोट यादव व मुस्लिम के साथ अगर निषाद वोट एकमुश्त हो जाए तो उपचुनाव में सपा प्रत्याशी की स्थिति काफी मजबूत हो सकती है। अव्वल यह कि मुस्लिम समाज की राजनीति करने वाली पीस पार्टी भी सपा और निषाद दल के साथ ही खड़ी है।
हालांकि, जानकार यह भी मानते हैं कि सपा के मूल वोट बैंक यादव व मुसलमान में एक हिस्सा यानी मुसलमानों के काफी वोट को कांग्रेस अपने पाले में करने में सफल होगी। जो इस गठबंधन की मजबूती को कम करने के लिए काफी है। उधर, भाजपा ने निषाद वोटरों में भी सेंध लगाने की कोशिशें शुरू कर दी है। बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने बसपा के पूर्व विधायक जय प्रकाश निषाद समेत करीब दर्जन भर निषाद नेताओं को पार्टी में शामिल कराया गया। माना जा रहा कि बसपा के पूर्व विधायक जय प्रकाश निषाद अन्य सजातीय नेता भाजपा में शामिल होने के बाद काफी संख्या में सजातीय वोट को भगवा दल के पाले में करने में सफल हो सकते हैं। ऐसे में निषाद वोटरों का एकमुश्त वोट पाने के लिए समाजवादी पार्टी और उसके गठबंधन दल खूब पसीना बहा रहे। यही नहीं सपा को यादव वोट के लिए ज्यादा कुछ तो नहीं करना पड़ रहा लेकिन मुसलमान वोट का अधिक से अधिक शेयर पाने के लिए भी कई स्तरों पर जूझना पड़ रहा।
बहरहाल, बीजेपी अधिक से अधिक निषाद नेताओं को पार्टी में शामिल कराकर निषाद वोट का कुछ प्रतिशत हासिल कर इस वोटबैंक में सेंध लगाने में जुटी है तो समाजवादी पार्टी निषाद दल की सारथी बनकर एकमुश्त वोट पाने का करिश्मा करने में लगी है। तो फिलवक्त आम निषाद वोटर मौन है और राजनीतिक चालों को थाहने में व्यस्त है।


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