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आयुष्मान कार्ड बनवाने वालों को तगड़ा झटका, इन्हें नहीं मिल पाएंगे पांच लाख

आयुष्मान कार्ड बनवाने वाले अब सावधान हो जाएं, बीते सात साल में हजारों की संख्या में फर्जी आयुष्मान कार्ड बनने से सरकार भी काफी चिंतित है। आने वाले दिनों में अब सिस्टम पर पैनी नजर रखी जा रही है।

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फोटो सोर्स: सोशल मीडिया, आयुष्मान कार्ड में बदलाव

मोदी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के नियमों में अचानक बड़ा बदलाव कर दिया है, अगर आयुष्मान कार्ड बनवाना हो तो गंभीरता से इन चीजों को जान लें नहीं तो निराशा ही हाथ लगेगी। जानकारी के मुताबिक अब नए आयुष्मान कार्ड केवल तभी बनेंगे जब आपके आधार ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी होगी।

आयुष्मान कार्ड के लिए नया सिस्टम 'BIS-2.0' लागू

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इसके लिए नया सिस्टम 'BIS-2.0' लागू कर दिया है, जिससे अब बिना आधार वेरिफिकेशन के कार्ड बनना मुमकिन नहीं होगा। अब आयुष्मान कार्ड में नए सदस्यों को जोड़ने का विकल्प लगभग खत्म कर दिया गया है। साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा के मुताबिक, अब केवल उन्हीं परिवारों में नए सदस्य जोड़े जा सकेंगे जो SECC-2011 के डेटा के तहत बचे हुए हैं। आम लोगों के लिए अब मनमर्जी से कार्ड में नाम जुड़वाना संभव नहीं होगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से भी हो रही है निगरानी

आयुष्मान कार्ड बनवाने में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर का सहारा लिया जा रहा है। NHA की यह विशेष तकनीक संदिग्ध कार्डों की पहचान स्वयं कर लेती है। जैसे ही कोई कार्ड संदिग्ध पाया जाता है, सिस्टम तुरंत उस पर मिलने वाले मुफ्त इलाज को रोक देता है। इसके बाद उस कार्ड की बारीकी से जांच करते हैं और सही पाए जाने पर ही उसे दोबारा एक्टिव किया जाता है।

61,932 कार्ड निकले संदिग्ध

सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2018 से अब तक बने कार्डों में से करीब 61,932 कार्डों को संदिग्ध माना गया है। इनमें से 48,435 कार्डों का भौतिक सत्यापन जिला स्तर पर किया जा रहा है। प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को इन संदिग्ध कार्डों की लिस्ट सौंप दी है और कड़ी जांच के आदेश दिए हैं। बता दें कि आयुष्मान कार्ड में बड़ी गड़बड़ी पाए जाने के बाद एसटीएफ की रिपोर्ट के बाद एक कर्मचारी को हटाया भी गया है। गोरखपुर में भी संदिग्ध कार्डों की निगरानी हो रही है।


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