
Shivpal akhilesh Yogi
समाजवादी पार्टी के नेता पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह को अगर समाजवादी सेकुलर मोर्चा अपने पाले में करने में सफल रहा तो बस्ती और आसपास के जिलों का राजनैतिक समीकरण बिगड़ सकता है। यह राजनैतिक दांव समाजवादी पार्टी की राह में मुश्किल खड़ी करने के साथ ही अन्य विपक्षी दलों की राह भी कठिन कर सकता है। चर्चा तो यह भी है कि राजकिशोर सिंह 2019 के चुनाव में शिवपाल के दल से बस्ती लोकसभा चुनाव में भाग्य भी आजमा सकते हैं।
राजनैतिक जानकारों की मानें तो पहली बार विधायकी का चुनाव जीतने के बाद से ही लगातार मंत्री बनने वाले राजकिशोर सिंह गोरखपुर-बस्ती मंडल का एक जाना पहचाना नाम है। पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह अपनी दबंग छवि के लिए तो जाने ही जाते हैं, समाजवादी नेता शिवपाल यादव के अतिकरीबियों में शुमार रहे हैं। सपा सरकार में मंत्री रहते हुए राजकिशोर सिंह की तूती बोलती थी। समाजवादी सरकार में तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह के पसंद से ही बस्ती और गोरखपुर मंडल में अधिकारियों की तैनाती की जाती रही। लेकिन सपा सरकार में मंत्री रहते हुए जमीन घोटाले व एक भर्ती घोटाले में नाम आने के बाद अखिलेश यादव ने अपने मंत्रीमंडल से इनको बर्खास्त कर दिया था। हालांकि, बीते विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने हरैया विधानसभा से इनको प्रत्याशी बनाया था लेकिन जीत की हैट्रिक बनाने वाले राजकिशोर 2017 का चुनाव हार गए।
पहले चुनाव में जमानत भी नहीं बची थी, जब जीते तो मंत्री बने
बस्ती के हरैया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले राजकिशोर सिंह ने अपना पहला विधानसभा चुनाव निर्दल प्रत्याशी के रूप में 1996 में लड़ा था। लेकिन इस चुनाव में उनकी जमानत जब्त हो गई थी। राजकिशोर सिंह को महज 1550 वोट मिले थे। छात्र राजनीति से अपना राजनैतिक सफर शुरू करने वाले राजकिशोर का राजनैतिक सितारा साल 2002 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने के बाद चमका। और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जिला पंचायत सदस्य रहते हुए राजकिशोर सिंह को 2002 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने हरैया से प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में राजकिशोर सिंह 34454 वोट पाकर विजयी हुए। एक साल बाद ही बसपा से बगावत कर सपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार में मंत्री बन गए। मंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी मां को जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर आसीन कराया।
2007 के विधानसभा चुनाव में सपा से वे विधानसभा में पहुंचे। इस बार मायावती के नेतृत्व में बसपा की सरकार बनी। बसपा ने बाहुबली राजकिशोर सिंह पर गैंगेस्टर लगवाया और जेल भेजवाया। बसपा शासनकाल में मुश्किलों भरा कार्यकाल खत्म होने के बाद जब 2012 में सपा की सरकार बनी तो राजकिशोर सिंह तीसरी बार चुनाव जीतकर फिर मंत्री बने। इस बार उनको कई महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व मिला। अखिलेश यादव के शासनकाल में मंत्री राजकिशोर सिंह का कद काफी बढ़ गया। प्रदेश के सबसे ताकतवर मंत्री शिवपाल यादव के अतिकरीबी रहे राजकिशोर ने अपनी राजनैतिक ताकत भी खूब बढ़ाई। 2014 के लोकसभा चुनाव में अपने भाई बृजकिशोर उर्फ डिंपल को लोकसभा प्रत्याशी बनवाया लेकिन वह चुनाव हार गए। पंचायत चुनाव के दौरान अपने बेटे को निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया। भाई डिंपल यादव को एमएलसी का टिकट मिला लेकिन राजनैतिक समीकरणों की वजह से उनका टिकट तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने काट कर अपने एक करीबी सनी यादव को दे दिया। इस डेमेज कंट्रोल के लिए अखिलेश यादव ने राजकिशोर के भाई डिंपल को दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बनाते हुए उर्जा सलाहकार बनाया।
लेकिन दिल्ली-एनसीआर में हुए एक जमीन घोटाले सहित कई घोटालों में नाम आने के बाद अखिलेश यादव ने राजकिशोर सिंह को बर्खास्त भी कर दिया।
जिला पंचायत चुनाव में गोरखपुर और बस्ती मंडल की थी जिम्मेदारी
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सपा ने सौंपी थी। उन पर अध्यक्ष पद की कुर्सी सपा के पास लाने की जिम्मेदारी थी। बस्ती जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अपने बेटे को निर्विरोध जीतवाने के बाद उनको योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में लगाया गया। यहां से सपा नेता मनुरोजन यादव की पत्नी गीतांजलि यादव चुनाव मैदान में थीं। जबकि भाजपा के बागी विधायक विजय बहादुर यादव के भाई दूसरी ओर मैदान में थे। चुनाव में विजय बहादुर पक्ष का पलड़ा भारी था। तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह गोरखपुर में डेरा डाले। अपने विभाग के एक प्रमुख सचिव का तबादला रातोरात गोरखपुर के डीएम पद पर कराया। नए डीएम के रूप में बस्ती जिले के निवासी और तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह के विभाग के प्रमुख सचिव ओएन सिंह ने डीएम का पद संभाला। मतदान के दौरान काफी बवाल मचा लेकिन जीत सपा के पाले में पहुंच गई।
Published on:
05 Oct 2018 05:06 pm
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