3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यूपी के उस डीजीपी की कहानी जो मायावती से लेकर योगी आदित्यनाथ तक का है चहेता

यूपी एससी-एसटी कमीशन के अध्यक्ष हैं, मुफलिसी भी भी डिगा न सका इरादा

2 min read
Google source verification
ex dgp brij lal

Ex DGP Brij Lal

गोरखपुर। कहते हैं कि कभी-कभी अपनों की खुशी के लिए हारना भी किसी जीत से कम नहीं होता। अपनों के चेहरे पर मुस्कान देखने के लिए हारना शायद मुफलिसी से जंग लड़कर आगे बढ़ रहे बिरजू को प्राइमरी कक्षाओं में आ गया था। तभी तो जब एक शिक्षाधिकारी ने दो भाइयों के बीच दो रुपये रखते हुए छीनकर हासिल करने की शर्त रखी तो बड़े ने अपनी पकड़ ढीली करतेे हुए छोटे को जीत जाने दिया। शायद वह उसी उम्र में जान गया था कि छोटे सहोदर की जीत में ही उसकी जीत छिपी है।
कम उम्र में ही बड़ी सोच रखने वाला यह बालक कोई और नहीं बल्कि यूपी के पूर्व डीजीपी और योगी आदित्यनाथ सरकार के अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष बृजलाल थे। बेहद मुफलिसी में बचपन गुजारने वाले बृजलाल ने अपनी मेधा के बल पर यूपी की सर्वोच्च कुर्सी हासिल करने में सफलता पाई। प्रदेश पुलिस के मुखिया के रूप में रिटायर्ड हुए बृजलाल अपने राजनैतिक पारी की भी शानदार आगाज किए हैं। सिद्धार्थनगर जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले पूर्व डीजीपी बृजलाल का जीवन बेहद मुफलिसी में कटा। खेतों में पिता का हाथ बंटाने के साथ वह पढ़ाई-लिखाई करते रहे। चार भाइयों में दूसरे नंबर के हैं। प्राइमरी स्कूल मध्यनगर से प्राथमिक शिक्षा हासिल करने वाले बृजलाल ने अपनी मेधा के बल पर छात्रवृत्ति पाते हुए आगे की शिक्षा हासिल किया। इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई इन्होंने शोहरतगढ़ के शिवपति इंटरमीडिएट काॅलेज से की। इसके बाद इलाहाबाद विवि से ग्रेजुएशन व पोस्ट गे्रजुएशन।

जब छात्रवृत्ति से खरीदी पहली साइकिल

70 के दशक की बात है। एक छात्र के लिए साइकिल बहुत बड़ी बात हुआ करती थी। पूर्व डीजीपी के जानने वाले बताते हैं कि इंटरमीडिएट में जब उनको छात्रवृत्ति मिली तो अपने लिए एक साइकिल खरीदी। साइकिल खरीदकर वह फूले नहीं समा रहे थे। कहीं जाने-आने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करते थे। लेकिन जब इलाहाबाद गए तो वहां से किसी ने उनकी साइकिल उड़ा दी। साइकिल चोरी का काफी अफसोस रहा लेकिन जीवन आगे बढ़ने का नाम है।
इलाहाबाद से स्नातक-स्नातकोत्तर करने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करने लगे। मेहनत रंग लाने लगी थी। पहला रिजल्ट आया तो उनका चयन आईएफएस के लिए हो गया। लेकिन किस्मत में तो पुलिस विभाग में जाना लिखा था। अभी वह ज्वाइन करते कि इसी दौरान आईपीएस के रूप में उनका चयन हो गया। आईपीएस के रूप में 37 साल सेवा देने वाले बृजलाल प्रदेश पुलिस के सर्वोच्च पद पर आसीन रहतेे हुए सेवानिवृत्त हुए। अपने सेवाकाल के दौरान पूर्व डीजीपी बृजलाल काफी चर्चित अफसर रहे। अपराध नियंत्रण के लिए उन्होंने कई आॅपरेशन्स को अंजाम दिया। अब यूपी की बीजेपी सरकार में राजनीति की नई पारी खेलने में व्यस्त हैं। अपनी माटी के सपूत को बड़े ओहदे पर देख बुद्धभूमि भी निहाल हो रहा।


बड़ी खबरें

View All

गोरखपुर

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग