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तीन हजार पुलिस, चार हजार RTO….गोरखपुर से दिल्ली तक बेधड़क दौड़ रही हैं लक्जरी बसें

गोरखपुर से कई महानगरों को जाने के लिए प्राइवेट लक्जरी बसों की भरमार है। बस मालिकों को कोई दिक्कत न हो तो बस के लास्ट स्टॉप तक पहुंचने की पूरी जिम्मेदारी दलाल की होती है। यह दलाल पुलिस और RTO से बचने के नाम पर हर महीना सात हजार प्रति बस लेता है। इसमें से तीन हजार पुलिस के हिस्से में जाता है तो चार हजार RTO के हिस्से में। इसके बाद बेधड़क दौड़ती हैं लक्जरी बसें दौड़ती हैं।

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पार्टी परमिट वाली बसों को फुटकर सवारी भरकर गोरखपुर से दिल्ली तक दौड़ाना है, तो दलालों की सेवा हाजिर है। नौसढ़ में कार्यालय खोलकर अवैध धंधा चला रहे हैं। प्रति माह तीन हजार रुपये पुलिस तो चार हजार रुपये आरटीओ के नाम पर हर गाड़ी से वसूल कर ये उन्हें निष्कंटक संचालन का भरोसा देते हैं। अवैध स्टैंड का शुल्क अलग से है। इस वसूली के बदले सवारियां भरने तक में ये दलाल सहयोग देते हैं। हालांकि, सवारी के बदले बस मालिक से प्रति यात्री 10 प्रतिशत कमीशन तय होता है। बस सवारी लेकर गोरखपुर से निकलेगी तो फैजाबाद तक उसे कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद आगे की सेटिंग वहां का स्थानीय दलाल करता है। रविवार को जागरण की पड़ताल में ये बातें सामने आईं।

ट्रांसपोर्ट माफिया की शह पर महेवा से बाघागाड़ा और नौसढ़ से सहजनवां तक दर्जन भर अवैध स्टैंड से करीब 500 स्लीपर बसें चल रही हैं। जब दुर्घटनाएं होती हैं और सरकार सख्त होती है तो यातायात पुलिस से लेकर आरटीओ के अधिकारी सड़क पर उतरकर इन पर कार्रवाई करने लगते हैं। सामान्य दिनों में तो उन्हें अवैध धंधे का यह खुला खेल दिखाई ही नहीं देता।

जब इस पर हो हल्ला होता तब पुलिस और RTO का सख्त अभियान चलता लेकिन फिर पुराने स्टाइल में आ जाता है। करीब एक वर्ष पहले अवैध स्टैंड और वसूली को लेकर चलाए गए अभियान के बाद सख्ती शुरू हुई थी। कई अवैध स्टैंड बंद कराए गए। कुछ दलाल भी पकड़े गए। यह कारोबार एक बार फिर से चालू है। अंतर सिर्फ इतना है कि वसूली के लिए रखे गए लोगों के नाम और चेहरे बदल गए हैं।

बस चलवाने के नाम पर ब्रोकर से हुई बातचीत

बस मालिक - क्या हाल है, बस मालिक बोल रहे हैं, गोरखपुर से दिल्ली तक स्लीपर बस चलवानी है
ब्रोकर - चल जाएगी, लेकिन इस समय कार्रवाई चल रही है
बस मालिक - ठीक है, लेकिन क्या करना होगा
ब्रोकर - अपनी ट्रेवल एजेंसी के नाम से आनलाइन अकाउंट खोल लीजिए, आगे का हम देख लेंगे
बस मालिक - आगे के लिए क्या करना होगा
ब्रोकर - कुछ रुपये भी लगेंगे
बस मालिक - कितना लगेगा
ब्रोकर - पुलिस को प्रति गाड़ी तीन हजार रुपये और आरटीओ को चार हजार रुपये देना होता है।
बस मालिक - कौन लेता है रुपये, देने के बाद दिल्ली तक कोई नहीं पकड़ेगा
ब्रोकर - नौसढ़ से चलने के नाम पर यातायात पुलिस को देना होता है। रुपये लेने के लिए संजय भाई आते हैं, जो वसूली करके पुलिस के पास पहुंचाते हैं। इसके अलावा आरटीओ से उनकी सेटिंग है। चार हजार देने के बाद गोरखपुर से फैजाबाद में प्रवेश तक कोई नहीं पकड़ेगा। वहां से आगे के लिए उनका साथी लखनऊ में है। जिसकी सेटिंग आरटीओ से है।
बस मालिक - तो संजय भाई से मिलना होगा
ब्रोकर - नहीं आप कार्यालय आइए, संजय भाई को बुला देंगे और मुलाकात हो जाएगी
बस मालिक - सवारी के लिए क्या करना होगा
ब्रोकर - कुछ नहीं, आनलाइन बुकिंग से जो आ जाएंगे वह बैठेंगे ही। जो सीट खाली होगी वह यहां आने वाली सवारियों से भर जाएगी। इसके लिए 10 प्रतिशत प्रति सवारी देना होगा।
बस मालिक - बहुत परेशानी है बस चलवाने में
ब्रोकर - अरे कोई परेशानी नहीं है, आप बस दीजिए, बाकी सब सेटिंग है। बस चलवा देंगे। कितनी बसे हैं
बस मालिक - दो स्लीपर बसें हैं
ब्रोकर - जैसा होगा बताइएगा, नौसढ़ में कार्यालय है, जब आना होगा फोन करिएगा।

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