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टूटते परिवारों के लिए नजीर है 72 सदस्यों वाला यह कुनबा

एक छत के नीचे रहते, एक चूल्हे पर मिलकर पकाते

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Joint family

Joint family Rajdhani

तरक्की की रपटीली राहों पर सरपट भाग रहे टूटते परिवारों के लिए गोरखपुर का यह परिवार एक नजीर है। एक छत, एक चूल्हा और तीन पीढ़ियों को समेटे 72 लोगों का कुनबा रिश्तों की मजबूत बंधन की गवाही दे रहा। जहां एक-एक इंच जमीन के लिए सहोदर ही सहोदर के जान का दुश्मन बना हुआ है वहां इस परिवार ने संयुक्त रहकर सफलता की सीढ़ियां चढ़ने के साथ रिश्तों में मिठास घोल समाज को आईना दिखाया है।
गोरखपुर से करीब 27 किलोमीटर दूर राजधानी गांव वैसे तो आम गांवों की तरह एक सामान्य गांव ही है लेकिन प्राचीन भारतीय संयुक्त परिवारों की परंपरा को समेटे यहां रहने वाला एक कुनबा इस गांव को विशेश बना देता है।
रिटार्यड प्रधानाचार्य छत्रधारी यादव का यह कुनबा करीब 72 सदस्यों से आबाद है। यह परिवार आज भी एक साथ एक छत के नीचे रहता है। कई पीढ़ियों से यहां विभाजन नहीं हुआ। सभी एकसाथ रहते, एक ही चूल्हे पर सबका भोजन पकता और एक दूसरे की सहभागिता से घर-बाहर, खेतीबाड़ी का काम निपटता है।
इस परिवार के सदस्य व पेशे से शिक्षक योगेंद्र यादव कहते हैं कि बंटवारा शब्द सुनकर रूह कांप जाती है। वह बताते हैं कि आज भी घर का मुखिया एक ही व्यक्ति है। घर के सबसे बड़े की देखरेख में हर काम कराया जाता है।
पूछने पर वह बताते हैं कि हमारे संयुक्त परिवार को चलाने के लिए सत्तर-अस्सी हजार रुपये महीना का खर्च आता है। धन का प्रबंध कैसे होता है, इस सवाल पर वह बताते हैं कि सभी लोग इसके लिए सहयोग करते हैं। श्रम
से लेकर हर काम के लिए सबकी जिम्मेदारी तय है। सब अपनी अपनी जिम्मेदारी को निभाते हैं। वह बताते हैं कि घर में अगर कोई परेशानी होती है तो सब मिल बैठकर इसका हल निकालते हैं। परिवार में हर परेशानी में सब साथ होते,
हर सुख-दुख में सब साथ होते, हर निर्णय सभी साथ मिलकर लेते।

काफी पढ़ा-लिखा है यह परिवारों

गांव में निवास करने वाले इस कुनबे में करीब-करीब सभी लोग उच्चशिक्षित हैं। राजधानी गांव के स्वर्गीय राजबली यादव की पांच संतानें हैं रामचंद्र यादव, रामकवल यादव, छत्रधारी यादव, पौहारीशरण यादव व गिलासी
देवी। इनमें पूर्व प्राचार्य रामकवल यादव व रामचंद्र यादव का निधन हो चुका है। पुत्री गिलासी देवी की शादी वाराणसी में पीएनबी बैंक में प्रबंधक रह चुके आरएस यादव के साथ हुई थी। छत्रधारी यादव इंटर काॅलेज के
रिटायर्ड शिक्षक हैं। गांव के प्रधान भी रह चुके हैं। एक भाई पौहारीशरण यादव रेलवे में बड़े पद पर रह चुके हैं। घर के कई अन्य सदस्य भी सरकारी नौकरी आदि में हैं। इनमें रामउग्रह यादव परिवार के शैक्षणिक संस्थानों की देखरेख करते हैं। एक अन्य सदस्य दिवाकर यादव रोडवेज में हैं। परिवार में करीब एक दर्जन सदस्य योगेंद्र यादव, डाॅ.राकेश, डाॅ.रेणु, उमेश, जयंती, सुचित्रा, शुचिता शिक्षक हैं। एक सदस्य कमलेश सेना में हैं तो शैलेश यूपी
पुलिस में हैं। एक अन्य सदस्य अखिलेश आरपीएफ में हैं तो सुरेश यादव रोजगार सेवक हैं और सतपाल इंजीनियर हैं। जबकि परिवार के सदस्य रतनपाल, कुंवरपाल, समरपाल, वर्तिका, दीपिका, प्रियम्बदा, ममता उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे। घर के नन्हें सदस्य गौरव, राजदीप, पार्थ, सौरभ, कृष्णपाल, धर्मपाल, प्रज्जवल, उज्जवल, शिखा, नीतिन, पथ्या, शिवांगी, गार्गी, आदेश, निशांत, अविरल, स्वधा अभी स्कूल में पढ़ते हैं। घर की सबसे बुजुर्ग महिला सदस्या छबिया देवी, शांति देवी, चंद्रावती देवी एक दूसरे के सहयोग से घर का संचालन करती हैं।

एक सुकून है संयुक्त परिवार में

परिवार के सदस्य प्रधानाचार्य रामउग्रह यादव बताते हैं कि संयुक्त परिवार एक संबल है। हर सुख-दुख में एकसाथ रहने से दुःख कम और खुशी दुगुनी हो जाती है। इस तरह का परिवार ‘मैं’ से नहीं ‘हम’ के साथ चलता है।