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आक्सीजन की कमी से मौतों को नकारने वाली यूपी सरकार का कोर्ट में आक्सीजन की कमी का हलफनामा

बीआरडी मेडिकल काॅलेज में आक्सीजन की कमी से हुई मौतों पर ये कैसी राजनीति

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आक्सीजन की कमी से मौतों को नकारने वाली सरकार का कोर्ट में आक्सीजन की कमी का हलफनामा

बीआरडी मेडिकल काॅलेज में आक्सीजन की कमी से हुई मौतों का मामला एक साल से अधिक होने के बावजूद अभी तक यह तय नहीं हो सका है कि आक्सीजन की कमी से मौतें हुई थी या वजह कुछ और थी। हालांकि, इस मामले पर राजनीति अपने शबाब पर है। सरकार इस मामले में खुले तौर पर आक्सीजन की कमी से मौतों को नकार रही है, जबकि न्यायालय में हलफनामा दाखिल किया है कि आक्सीजन की कमी हुई थी।
प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने बीआरडी मामले पर बयान देते हुए दो-तीन दिन पहले कहा कि बीआरडी मेडिकल काॅलेज में आक्सीजन की कमी नहीं आंतरिक राजनीति है मौत का कारण। उन्होंने दावा किया जांच रिपोर्ट के अनुसार अगर आक्सीजन से मौतें होती तो सबसे अधिक वे बच्चे मरते जो वेंटीलेटर पर थे।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद आक्सीजन की कमी से हुई मौतों के मामले में बीआरडी के डाॅक्टर रहे डाॅ.कफिल खान ने कहा कि जब आक्सीजन की कमी से मौत नहीं हुई तो कार्रवाई क्यों की गई। क्यों सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर आक्सीजन की कमी और सप्लाई बाधित किए जाने की बात स्वीकार की है।
बता दें कि बीआरडी मेडिकल काॅलेज में बीते साल अगस्त महीने में आक्सीजन की कमी से हुई मौतों के मामले में उच्च न्यायालय में सरकार ने हलफनामा दाखिल किया है कि आक्सीजन की कमी मेडिकल काॅलेज में हुई थी। लिक्विड आक्सीजन सप्लाई करने वाली संस्था द्वारा आक्सीजन सप्लाई बाधित कर दिया गया था। काॅलेज के तत्कालीन प्राचार्य डाॅ.राजीव मिश्र की पत्नी डाॅ.पूर्णिमा शुक्ला की दखलदांजी रही इस पूरे प्रकरण में। दस प्रतिशत कमीशन की उनके द्वारा मांग की जाती रही। इसमें कर्मचारियों की भी शह थी।

एक-एक कर अधिकतर आरोपी जमानत पर

बीआरडी मेडिकल काॅलेज में आक्सीजन की कमी से हुई मौतों के प्रकरण में अधिकतर आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं। सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट ने लिक्विड आक्सीजन सप्लाई को बाधित करने वाले सप्लायर पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी को जमानत पर रिहा कर दिया। इसके बाद आक्सीजन की कमी होने के दौरान अपने पैसों से आक्सीजन मंगाकर व्यवस्था करने के बाद सुर्खियों में आए डाॅ.कफिल खान को जमानत मिली। फिर एनेस्थिसिया के तत्कालीन विभागाध्यक्ष डाॅ.सतीश कुमार, तत्कालीन प्राचार्य डा.राजीव मिश्र, डाॅ.पूर्णिमा शुक्ला को कोर्ट से जमानत एक के बाद एक को मिल गया।

यह था मामला

बीते साल अगस्त महीने में बीआरडी मेडिकल काॅलेज में लिक्विड आक्सीजन की आपूर्ति बंद होने से तीन दर्जन से अधिक मासूमों की मौत हो गई थी। मामला जब तूल पकड़ा था तो प्रदेश सरकार ने बीआरडी मेडिकल काॅलेज के तत्कालीन प्राचार्य, आक्सीजन गैस आपूर्तिकर्ता सहित नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। पूर्व प्राचार्य डाॅ.राजीव मिश्र व उनकी पत्नी डाॅ.पूर्णिमा शुक्ला को एसटीएफ ने कानपुर से 29 अगस्त 2017 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद एसटीएफ-पुलिस ने अधिकतर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। दो आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर किया था।