
महिला अध्ययन केंद्र ,दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर तथा महिला बैरक, जिला कारागार गोरखपुर के संयुक्त तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025,” Yoga for one Earth one Health” के संकल्प को साकार करते हुए “ महिला बंदियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग " विषय पर योग प्रशिक्षण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिला कैदियों को योग के माध्यम से मानसिक तनाव, अवसाद और शारीरिक समस्याओं से राहत दिलाना रहा। सत्र में ताड़ासन, भुजंगासन, वज्रासन और त्रिकोणासन जैसे सरल और प्रभावी योगासनों का अभ्यास कराया गया, जो मानसिक शांति और शारीरिक सुदृढ़ता प्रदान करते हैं। इस कार्यक्रम में जेल अधीक्षक डी.के पांडे, जेलर अरुण कुमार और महिला जेल की उप-जेलर अनीता श्रीवास्तव भी उपस्थिति रहीं। इसके साथ ही अचिन्त्य लाहिड़ी, प्रो दिव्या रानी सिंह, निदेशक, महिला अध्ययन केंद्र उपस्थित रहीं।
गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा महिला कैदियों के लिए आयोजित योग प्रशिक्षण शिविर एक प्रेरणादायक और अनुकरणीय पहल है। यह केवल जेल सुधार का उदाहरण नहीं, बल्कि पुनर्वास, आत्म-साक्षात्कार और समाज में पुनः स्थापना की दिशा में एक सार्थक कदम है। इस तरह के प्रयास भारतीय दंड व्यवस्था को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत हैं। इस योग कार्यक्रम में सभी बंदी महिलाओं ने भाग लिया।
प्रशिक्षित योग गुरुओं (नीलम एवं विंध्यवासिनी) द्वारा महिलाओं को विशेष योग आसनों, प्राणायाम और ध्यान की तकनीकों से अवगत कराया, जो विशेष रूप मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक है, जिनका नियमित अभ्यास चिंता, अवसाद और तनाव को कम करने में सहायक होता है।
शवासन (Shavasana / Corpse Pose)जो मानसिक शांति, तनाव मुक्ति और गहरी विश्रांति देता है। प्रत्येक अभ्यास के बाद इसे अंत में किया जाता है। सुखासन (Sukhasana / Easy Pose) इससे मानसिक संतुलन बढ़ता है और तनाव कम होता है। बालासन (Balasana / Child’s Pose) यह मस्तिष्क को शांत करता है जिससे मन को सुकून मिलता है। वज्रासन (Vajrasana / Thunderbolt Pose) यह पाचन के लिए अच्छा है और मन को एकाग्र करता है।भोजन के बाद ध्यान के लिए उत्तम मुद्रा हैl , उष्ट्रासन (Ustrasana / Camel Pose) यह हृदय चक्र को खोलता है और भावनात्मक तनाव को दूर करता है। सेतु बंधासन (Setu Bandhasana / Bridge Pose) यह अवसाद और थकान से राहत देता है।
अधोमुख श्वानासन (Adho Mukha Svanasana / Downward-Facing Dog)चिंता और मानसिक थकान को कम करने में सहायक। पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana / Seated Forward Bend)तनाव और चिंता में राहत देता है। पवनमुक्तासन(Pawanmuktasana / Wind-Relieving Pose) नींद में सुधार लाता है। और नाड़ी शोधन प्राणायाम (Nadi Shodhana / Alternate Nostril Breathing) यह प्राणायाम मस्तिष्क की दोनों गोलार्द्धों को संतुलित करता है।
अत्यधिक प्रभावी है चिंता, अवसाद और गुस्से को शांत करने में।
इसे साथ ही योग प्रशिक्षिका नीलम के द्वारा हास्य आसान का अभ्यास कराया गया जिसे महिला बंदियों द्वारा पसंद किया गया, एवं महावारी के दर्द से राहत के लिए बटरफ्लाई आसन, शरीर में संतुलन एवं स्थिरता के लिए चक्रासन, अर्थ कती चक्रासन और मरीचि आसन कराया गयाl इसके साथ ही जेल में सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिदिन 5 मिनट ओम का उच्चारण एवं गायत्री मंत्र का अभ्यास करने को कहा गया।
महिला अध्ययन केंद्र की निर्देशक प्रो दिव्या रानी सिंह ने इस अवसर पर कहा, "हमारा उद्देश्य है कि शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से योग समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जाए। महिला कैदी भी समाज का हिस्सा हैं और उन्हें पुनर्वास का पूरा अधिकार है। यह पहल उसी दिशा में एक छोटा पर महत्वपूर्ण कदम है।" उन्होंने आगे बताया कि यह प्रशिक्षण एक शोध परियोजना का भी विषय बन सकता है, जिसमें यह अध्ययन किया जा रहा है कि नियमित योगाभ्यास से महिला कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।
आगे की योजना, के बारे में उन्होंने कहा कि इस पहल के सफल क्रियान्वयन के बाद विश्वविद्यालय और जिला जेल प्रशासन द्वारा हर महीने ऐसे योग सत्र आयोजित किया जा सकता है साथ ही, प्रशिक्षकों को शिक्षित महिला कैदियों को प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे अन्य कैदियों को भी योग सिखा सकें। कार्यक्रम में गृह विज्ञान विभाग की शोधार्थी काजोल आर्यन, और शिवांगी मिश्रा उपस्थित रही।
Published on:
26 May 2025 11:43 pm
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