गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शहर स्मार्ट बनने की होड़ में शामिल होने को बेचैन है। विकास के तमाम दावे और हकीकत देखने को मिल रहे। लेकिन कड़ाके की ठंड में रात को शहर में एक विद्रुप नजारा भी देखने को मिल जाएगा। जिन लोगों के बल पर शहर विकास के पायदान पर चढ़ने की कोशिश में है उनके लिए ही इस कड़ाके की ठंड में कोई व्यवस्था नहीं है। अलाव का शहर में घोर अभाव है, लोकल सरकार इसको उपलब्ध कराने में असमर्थ साबित हो रही।
गोरखपुर शहर में हजारों की संख्या में लोग रोजी रोजगार की तलाश में आते हैं। इसमें अधिकतर मजदूर वर्ग के लोग होते हैं जो मजदूरी कर, कहीं कामधंधा कर दो जून की रोटी का इंतजाम कर दूर किसी गांव में बसे अपने परिवार की आजीविका की खातिर जीतोड़ मेहनत करते। दिन भर मेहनत और रात में आराम के लिए कोई फुटपाथ ही इनका आसरा होता। लेकिन कड़ाके की ठंड इनकी दुश्वारियां बढ़ा रही। निश्ठुर मौसम और बेदर्द लोकल सरकार की वजह से रात इनके लिए किसी सितम से कम नहीं गुजर रही। शहर में रात को घूमने पर आसानी से इनकी दुश्वारियां को समझा जा सकता है।
शहर के अधिकतर प्रमुख जगहों पर अलाव का अभाव है। कई जगहों पर लोग कागज, पुराने टायर आदि जलाकर मौसम की ठंडी से बचने की कोशिश करते नजर आए।
नगर निगम अलाव उपलब्ध कराने में असफल रहा तो लोग किसी तरह पालीथीन, गत्ता, कूड़ा आदि जलाकर ठंड से बचने का जतन कर रहे। गोरखपुर के सबसे पाॅश इलाके हरिओमनगर में शाम को कुछ लोग पालीथीन जलाकर ठंड से बचने की कोशिश में लगे थे।