
NCL CMD appeals to CM to build airport in Singrauli
ग्रेटर नोएडा। जेवर में बनने जा रहे एशिया के चौथे सबसे बड़े एयरपोर्ट (jewar airport) के शिलान्यास की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। जहां एक तरफ शिलान्यास कार्यक्रम के लिए इवेंट कंपनी का चयन किया जा रहा है तो वहीं इस बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (sbi) ने इस प्रोजेक्ट के लिए 3725 करोड रुपये की मंजूरी दे दी है। जिसके बाद माना जा रहा है कि जल्द ही एयरपोर्ट का निर्माण शुरु हो जाएगा। दरअसल, यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने जानकारी देते हुए बताया कि एयरपोर्ट के विकास के लिए देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के साथ साझेदारी करके हमें बेहद खुशी हो रही है। प्रोजेक्ट के लिए बैंक ने 3725 करोड़ का संपूर्ण कर्ज 20 वर्षों की डोर-टू-डोर अवधि पर उपलब्ध कराया है।
उन्होंने बताया कि यूपी सरकार ने प्रोजेक्ट की पूरी प्रक्रिया के दौरान हर तरह से सकारात्मक समर्थन दिया है। जो कि हमारे लिए महत्वपूर्ण रहा है। यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड जेवर में बनने वाले एयरपोर्ट के निर्माण कार्य को यथाशीघ्र शुरू कराने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि अभी हमें उत्तर प्रदेश सरकार की विस्थापन और पुनर्वास प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार है। जिस पर शासन द्वारा फिलहाल कार्य किया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद एयरपोर्ट के निर्माण की शुरुआत होगी। यह एयरपोर्ट न सिर्फ यूपी की प्रगति के लिहाज से खास साबित होगा, बल्कि भारत में हवाई सेवाओं के लिए मील का पत्थर भी साबित होगा।
दुनिया की सबसे भरोसेबंद कंपनी पर बनाने का ठेका
बता दें कि जेवर में प्रस्तावित एयरपोर्ट बनाने का ठेका ज्यूरिख एजी को दिया गया है। यह दुनिया की सबसे भरोसेमंद एयरपोर्ट निर्माता कंपनियों में से एक है और जानकारी के अनुसार कंपनी में 1,500 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। 2019 में 31 मिलियन से अधिक लोगों ने ज्यूरिख हवाई अड्डे से यात्रा की है। इससे यह क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। करीब 27,000 लोगों को रोजगार देने वाली लगभग 280 कंपनियों के साथ ज्यूरिख हवाई अड्डा इस क्षेत्र के लिए एक प्रमुख आर्थिक केंद्र है। वहीं यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की 100 प्रतिशत सहायक कंपनी है। इसे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा विकसित करने के लिए सहायक के तौर पर गठित किया गया है। यह प्रोजेक्ट 29,500 करोड़ रुपये का है। इसको पूरा करने के लिए 2023 का लक्ष्य रखा गया है। माना जा रहा है कि 2024 तक यहां से पहली उड़ान भरी जा सकती है। हांलाकि, कोरोना काल की वजह से प्रोजेक्ट पूरा होने में देर हो सकती है।
Published on:
06 Jun 2021 04:13 pm
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