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Seema Haider Love Story: पाकिस्तान में सीमा की बढ़ेंगी मुश्किलें, पाक डकैतों ने दी है ये धमकी, जानें क्या कहता है पाक का ईशनिंदा कानून?

Seema Haider Love Story: पाकिस्तान से भागकर आई सीमा हैदर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। एक ओर जहां पाकिस्तान के डकैतों ने उसे धमकी दी है। वहीं दूसरी ओर पाक के ईशनिंदा कानून का भी उसपर उल्लंघन का आरोप लग सकता है।

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Seema Haider difficulties will not reduce in Pakistan

पाकिस्तान में बढ़ेंगी सीमा की मुश्किलें

Seema Haider Love Story: पाकिस्तान से आई सीमा हैदर से यूपी एटीएस पूछताछ कर चुकी है। एटीएस ने सीमा, सचिन और सचिन के पिता से घंटों तमाम सवाल किए। भारत में अवैध रूप से घुसपैठ को लेकर इंटेलिजेंस ने भी इनपुट दिया। अब सवाल है कि अगर सीमा को पाकिस्तान की इकरा की तरह वापस भेजा गया तो सीमा के साथ वहां क्या होगा? भारत के अलावा पाकिस्तान से सीमा हैदर के नाम धमकियां आ चुकी हैं। सीमा को अगर पाकिस्तान भेजा गया तो वहां हत्या कर दी जाएगी। सीमा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा था कि मुझे यहां रहने दिया जाए। सीमा हैदर बार-बार यह बोल रही है कि वो अपने प्यार के लिए भारत आई है, उसे जब वीजा नहीं मिला तो ये रास्ता अपनाना पड़ा।

बता दें कि सीमा हैदर और नोएडा का रहने वाला सचिन मीणा दोनों पबजी गेम खेलते थे। साल 2019 में गेम खेलते-खेलते दोनों ने नंबर एक्सचेंज किया और बातचीत होने लगी। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को चाहने लगे और साथ रहने का प्लान बना लिया। सीमा और सचिन नेपाल में मिले और एक होटल में सात दिन गुजारे। सीमा और सचिन का दावा है कि वहां दोनों ने शादी कर ली।

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सचिन को पापा बोलते हैं सीमा के बच्चे
इसके बाद सीमा अपने चार बच्चों को लेकर अवैध रूप से नोएडा पहुंच गई। करीब 15 दिन बाद जब यह केस सामने आया तो सनसनी फैल गई। पुलिस ने सीमा को अरेस्ट कर लिया। इसके बाद उसे कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया। सीमा से जब मीडिया ने बात की तो उसने हर बार यही कहा कि वो सचिन के साथ रहना चाहती है, सचिन से प्यार करती है। अब वो हिंदू हो गई है और उसके बच्चे सचिन को पापा बोलते हैं।

पाकिस्तान के डकैतों ने मंदिरों पर हमला करने की धमकी दी
सीमा हैदर और नोएडा के सचिन की लवस्टोरी पाकिस्तान पहुंचने के बाद वहां भी मामला गरमा गया। पाकिस्तानी डकैट रानो शार ने धमकी दी थी कि अगर सीमा को वापस पाकिस्तान नहीं भेजा गया तो वो पाकिस्तान में मंदिरों पर हमले करेगा। इस धमकी के बाद पाकिस्तान में मंदिर पर हमला किया भी गया। पाकिस्तानी अखबार DAWN की रिपोर्ट के मुताबिक, डकैतों के एक गिरोह ने सिंध के काशमोर में एक मंदिर पर और आसपास के समुदाय के घरों पर 'रॉकेट लॉन्चर' से अटैक किया। इस दौरान अंधाधुंध गोलीबारी भी की। सीमा भी पाकिस्तान के सिंध प्रांत की ही रहने वाली है।

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पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून का सता रहा डर
तमाम मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि पाकिस्तान में कई लोगों को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। हाल ही में एक शख्स को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई। शख्स पर वॉट्सएप के जरिए ईशनिंदा का आरोप लगा था। पाकिस्तान के एक जाने-माने शिक्षक जुनैद हफीज पर भी कई साल पहले ईशनिंदा का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि उन्हें कई साल से जेल में रखा गया है।

क्या है पाकिस्तान का ईशनिंदा कानून?
पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून लागू है। इस कानून को वहां कई चरणों में बनाया गया। समय के साथ इस कानून को और सख्त कर दिया गया। वैसे यह कानून ब्रिटिश शासन में बना था, लेकिन तब यह बेहद लचीला था। इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी धार्मिक स्थल या धार्मिक वस्तु को नुकसान पहुंचाता है, जो उसे सजा दी जाएगी। इसके तहत एक से 10 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान था।

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ईशनिंदा कानून के उल्लंघन पर मौत की सजा
साल 1980 में इस कानून में एक नई धारा जोड़ी गई, जिसके बाद कहा गया कि अगर कोई इस्लामी व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करता है तो उसे 3 साल की सजा हो सकती है। इसके बाद 1982 में इस कानून का फिर विस्तार किया गया और कहा गया कि अगर किसी व्यक्ति ने कुरान का अपमान किया तो उसे उम्रकैद होगी। वहीं साल 1986 में इस कानून को और सख्त बनाते हुए ईशनिंदा के लिए मौत या उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया।

ईशनिंदा कानून को लेकर जानकारों ने दी अपनी राय
एक हिंदी वेबसाइट पर प्रकाशित खबर के अनुसार डेलावेयर यूनिवर्सिटी में इस्लामिक स्टडीज के फाउंडिंग डायरेक्टर प्रो. मुक्तदर खान ने कहा कि ईशनिंदा कानून गैर इस्लामिक है और कुरान में कहीं भी इसका जिक्र नहीं है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि 'इस कानून में इतनी सख्ती बरतते हैं कि अगर आदमी माफी भी मांग ले तो भी उसे मौत की सजा दी जाती है। इस गुनाह के लिए मौत की सजा इस्लाम में है ही नहीं। दरअसल, सजा-ए-मौत जो देते हैं, वो कहते हैं कि अगर आप इस तरह की हरकत करें तो आप गैर-मुस्लिम हो जाते हैं और गैर-मुस्लिम होने की सजा मौत है। कुरान में इसका कोई सबूत नहीं है।