
मंडी में समर्थन मूल्य से कम रहता है दाम, खेती नहीं बन रही लाभ का धंधा
गुना. हाल में की गई समर्थन मूल्य में वृद्धि पर्याप्त नहीं है। समर्थन मूल्य बढ़ाने के नाम पर किसानों को गोलमाल किया जा रहा है।
गुना में सबसे ज्यादा सोयाबीन और उड़द की फसल होती है और सरकार ने इन दोनों ही उपज के समर्थन मूल्य में सबसे कम वृद्धि की गई है। सरकार ने ऐसी फसलों के दाम बढ़ाए हैं, जो कुछ एकड़ में बोई जाती है। यह कहना है क्षेत्र के किसानों का। पत्रिका ने हाल ही में सरकार द्वारा बढ़ाए गए समर्थन मूल्य पर जब किसानों से चर्चा तो उन्होंने वृद्धि को नाकाफी बताया। किसानों ने बताया कि गुना जिले में मौसम की बेरुखी की वजह से पहले ही खेती पर संकट खड़ा हो गया है।
७ जुलाई तक इतनी भी बारिश नहीं हो सकी की जमीन में बीज डाला जा सके। जिन किसानों ने बोवनी कर दी, उनकी फसल सूखने लगी है। किसानों ने कहा, समर्थन मूल्य तय हो जाता है फिर भी मंडी में दाम पर्याप्त नहीं मिलता। बाजार की कीमतों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। दरअसल, सरकार ने प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भले ही बढ़ोतरी कर दी हो, लेकिन बाजार में उसी फसल का क्या दाम होगा, यह तय नहीं है। आयात-निर्यात में कमी के कारण तीन-चार सालों से कृषि बाजार में आई मंदी से किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पाता। सरकारें समर्थन मूल्य या भावांतर भुगतान के दायरे में बांधकर एक निश्चित राशि या उसका अंतर किसानों को लुभाने देती है। जिससे किसान खुद को ठगा महसूस करते हैं।
खरीदी के दौरान भाव मंदा, बोवनी पर तेज
किसान हमेशा ही अपनी उपज बेचने के दौरान कम भाव मिलने और बीज खरीदी के दौरान भाव अधिक होने की शिकायत करते हैं। भावांतर की राशि और समर्थन मूल्य का दाम भी पूरी फसल पर नहीं मिल पाता। उधर, बोवनी के समय पर बीज और फसल का दाम बढ़ जाता है। किसान की अर्थव्यवस्था फसलों से चलती है। जब फसल तैयार होकर बाजार में आती है तो उसी समय दाम कम हो जाता है। इससे किसानों को हमेशा घाटे का सामना करना पड़ता है।
किसानों को घाटा
किसानों की मेहनत और खेतों में खर्च को ध्यान में रखते हुए दाम तय करना चाहिए। तब किसानों को लाभ मिलेगा। मंडी में कम दाम पर उपज खरीदी जाती है। कृषि से जुड़ी हर चीज महंगी हो रही है। उस हिसाब से दामों में वृद्धि नहीं हो रही है। इस वजह किसानों को घाटा उठाना पड़ रहा है।
-रघुवीर मीना, किसान
मॉडल रेट घटा दिया
अगर समर्थन मूल्य तय किया है तो इससे नीचे मंडी में डाक नहीं बुलना चाहिए। मंडी में इससे नीचे भी डाक बोली जाती है। इस कारण किसानों को घाटा होता है। पिछली बार भी समर्थन मूल्य तय किया था, लेकिन मॉडल रेट कम कर दिया गया। इससे किसानों को लाभ नहीं मिल।
-बृजेश धाकड़, किसान
किसान संतुष्ट नहीं
फसल का दाम लागत का डेढ़ गुना करने की बात कहीं थी, लेकिन इतना बढ़ाया नहीं है। किसानों को घुमाया जा रहा है। पिछली साल करीब ८० रुपए के करीब बढ़ाए थे, इसी दाम का डेढ़ गुना कर दिया है, इस वृद्धि से किसान संतुष्ट नहीं है। किसान बोवनी के लिए परेशान हो रहे हैं।
-जसवंत रघुवंशी, किसान नेता
फायदा नहीं होगा
गुना में मुख्य फसल सोयाबीन है। उसमें ३४९ रुपए बढ़ाए हैं। इससे कोई लाभ नहीं हुआ है। खाद-बीज मिल नहीं रहा। बीज ५ से ६ रुपए क्विंटल मिल रहा है। सोयाबीन का समर्थन मूल्य डेढ़ गुना बढ़ाते तो किसानों को फायदा होता। इस समर्थन मूल्य से कुछ फायदा नहीं होने वाला।
-मेहरवान सिंह धाकड़, मंडी अध्यक्ष
Published on:
08 Jul 2018 05:20 pm
