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पत्रिका अलर्ट : बुरी खबर : सोयाबीन फसल में तना मक्खी कीट का प्रकोप आया सामने

तना मक्खी से बचाने इन दवाओं का ऐसे करें उपयोग

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पत्रिका अलर्ट : बुरी खबर : सोयाबीन फसल में तना मक्खी कीट का प्रकोप आया सामने

पत्रिका अलर्ट : बुरी खबर : सोयाबीन फसल में तना मक्खी कीट का प्रकोप आया सामने

गुना. ऐसे किसानों के लिए बुरी खबर है, जिन्होंने पिछले कई सालों से सोयाबीन में घाटा उठाने के बाद भी इस बार सोयाबीन की बोवनी शुरूआत में ही कर दी थी। क्योंकि सोयाबीन में तना मक्खी कीट का प्रकोप सामने आया है। यह जानकारी लगते ही किसान बेहद चिंतित है। क्योंकि उसने काफी बड़ी रिस्क उठाने के बाद महंगा बीज खरीदकर सोयाबीन की बुवाई की थी। कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान में सोयाबीन की फसल बेहतर स्थिति में है। लेकिन कहीं-कहीं वर्षा कम होने के कारण फसल मुरझा रही है। सोयाबीन फसल में कीट प्रकोप होने की जानकारी किसानों द्वारा बताई गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि सोयाबीन फसल में तना मक्खी कीट का प्रकोप जो सामने आया है, उसका असर पूरे जिले में है। इससे फसल को बचाने के लिए सही कीनाशक का उपयोग सही समय पर किया जाना जरूरी हो गया है। मुख्य रूप से चना की इल्ली, सेमीलूपर तथा तना मक्खी कीट का प्रकोप है। सोयाबीन फसल में तना मक्खी कीट के प्रकोप की पहचान प्रारंभिक अवस्था में कर पाना कठिन होता है। इस कीट के प्रकोप के स्पष्ट लक्षण पुष्पन व फलन अवस्था में पौधा का पीलीपन के रूप में दिखाई देते हैं। जबकि कीट का प्रकोप फसल की वानस्पतिक वृद्धि की अवस्था पर ही संभावित होता है। इस अवस्था में तना मक्खी कीट के प्रकोप से कहीं-कहीं पौधे सूखने लगते हैं अथवा पीले दिखाई देते हैं। प्रभावित पौधे के तने को चीरकर देखने पर बहुत छोटी इल्ली दिखाई देती है। यह कीट फसल अवस्था में दो से तीन बार अपने जीवन चक्र को पूर्ण करता है। साथ ही सोयाबीन फसल को भारी क्षति पहुंचाता है।
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किसान ऐसे करें कीट की पहचान
इस कीट की मैगट सफेद रंग की तने के अंदर रहती है। व्यस्क कीट चमकीले काले रंग का दो किमी आकार का होता है।
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इन लक्षणों से पहचाने कीट का प्रकोप
इस कीट की मादा पत्तियों पर पीले रंग के अंडे देती है। जिनसे मैगट निकलकर पत्तियों की शिराओं में छेद कर 4 सुरंग बनाती हुई तने में प्रवेश करती है तथा तने को खोखला कर देती है। जिसके कारण पौधा शुरूवाती अवस्था में पत्तियां पीली दिखाई देती हैं। बाद में पूरा पौधा पीला पड़ जाता है।
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तना मक्खी से बचाने इन दवाओं का ऐसे करें उपयोग
बीटासाइफ्लूथ्रिन 8.49 प्रतिशत + इमिडाक्लोप्रिड 19.81 प्रतिशत ओडी 140 मिली प्रति एकड़
लेम्बडासाइलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत + थायोमिथाक्सॉम 12.9 प्रतिशत जेड सी 80 मिली प्रति एकड़
नोवाल्यूरॉन 5.25 प्रतिशत + ईमामेक्टिन बेन्जोएट 0.9 प्रतिशत एससी 250 मिली प्रति एकड़
फ्लूबेन्डामाइड 39.35 प्रतिशत एससी 70 मिली प्रति एकड़
क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी 40 मिली प्रति एकड़
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
जिले में सोयाबीन की फसल में तना मक्खी कीट का प्रकोप सामने आया है। जिससे फसल को बचाने समय रहते उसकी पहचान और नियंत्रण जरूरी है। इसके लिए किसान जो कीटनाशक का उपयोग करें वह कृषि वैज्ञानिक और विभाग के आला अधिकारियों से सलाह के पश्चात ही करें। क्योंकि यह कीट साधारण कीटनाशक नहीं मरता है। यदि किसान सही दवा का उपयोग नहीं करेंगे तो उन्हें ज्यादा आर्थिक नुकसान के साथ-साथ फसल की हानि भी हो सकती है। बीते वर्ष इसी कीट के प्रकोप से पूरे मध्यप्रदेश में करीब 39 प्रतिशत नुकसान हुआ था। गुना जिले में सबसे पहले यह जानकारी चाचौड़ा बीनागंज क्षेत्र से सामने आई है।
डॉ अखिलेख श्रीवास्तव, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख
कृषि विज्ञान केंद्र आरोन