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24 घंटे बेहोश रहा 6 महीने का बच्चा, परिजनों का आरोप- डॉक्टरों ने दी गलत दवा

negligence of doctors: एमपी में सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर तब खुल गई। गुना जिला अस्पताल में एक छह माह का मासूम बच्चा 24 घंटे से बेहोशी की हालत में अस्पताल के बेड पर पड़ा रहा।

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गुना

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Akash Dewani

Jun 02, 2025

six month old innocent child was lying unconscious on the hospital bed for 24 hours due to negligence of doctors in Guna district hospital mp

गुना जिला अस्पताल में 24 घंटे से बेहोश पड़ा रहा 6 महीने का बच्चा (फोटो सोर्स- गुना जिला अस्पताल फेसबुक पेज)

negligence of doctors: मध्य प्रदेश के गुना जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर तब खुल गई जब यहां भर्ती एक छह माह का मासूम बच्चा बीते 24 घंटे से बेहोशी की हालत में अस्पताल के बेड पर पड़ा रहा और डॉक्टरों की लापरवाही से बेहोशी की हालत में पहुंचने के बाद उस बच्चे को भोपाल के हमीदिया अस्पताल में रैफर कर दिया। जहां बच्चे की हालत चिंताजनक बनी हुई है।

पता नहीं कौनसी दवा दे दी- मासूम का पिता

यह गंभीर मामला पुरानी छावनी निवासी वीरेन्द्र रजक का है, जिन्होंने अपने छह माह के बेटे को बुखार आने पर पांच दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। बच्चे को देखने वाले डॉक्टरों में मनीष जैन, डॉ. पीसी वर्मा आदि हैं। परिजनों का आरोप है कि शनिवार सुबह करीब 7 बजे बच्चे को अस्पताल में एक ऐसी टेबलेट दी गई, जिसके बाद से वह होश में नहीं आया है।

परिजनों ने बच्चे की बिगड़ती हालत को देखकर डॉक्टरों से उसे तत्काल रैफर करने की मांग की, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें यह कहकर टाल दिया कि बच्चा ठीक है, घबराने की जरूरत नहीं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बच्चे को कौन सी दवा दी गई, इसका जिमा कोई भी डॉक्टर लेने को तैयार नहीं है। तीनों डॉक्टर एक-दूसरे पर जवाबदेही थोपते नजर आए।

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डॉक्टर ने की थी 15-20 हजार रुपए की मांग

मासूम के पिता वीरेन्द्र रजक ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि एक डॉक्टर ने उन्हें अस्पताल में सही इलाज के नाम पर निजी क्लीनिक में दिखाने की सलाह दी और इसके बदले 15 से 20 हजार रुपए की मांग की थी।

अस्पताल प्रबंधन की सफाई

सिविल सर्जन डॉ वीरेंद्र रघुवंशी ने कहा कि 'बच्चे के इलाज में डॉक्टर ने लापरवाही नहीं की है। मैंने संबंधित डॉक्टर से बात कर जानकारी ली है। बच्चे की हालत गंभीर थी इसलिए परिजनों के कहने पर ही उसे रेफर किया है। परिजन उसे डॉक्टर के इलाज में गड़बड़ी मान रहे हैं, जो सही नहीं है। '

इस पूरे मामले ने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जहां एक ओर समय पर सही इलाज नहीं मिलता, वहीं दूसरी ओर मरीजों के परिजनों को पैसों के बदले निजी क्लीनिक भेजने की कोशिश की जाती है। बहरहाल बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है और परिजन परेशान हाल में मदद की गुहार लगा रहे हैं। फिलहाल इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और डॉक्टरों की चुप्पी से मामला और भी संदेहास्पद बनता जा रहा है।