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(पत्रिका ब्यूरो,गुवाहाटी): आए दिन असम विधानसभा में चर्चा का स्तर गिर रहा है। बुधवार को प्रश्नोत्तरकाल के दौरान कांग्रेस के विधायक रूपज्योति कुर्मी और शिक्षा मंत्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य के बीच तीखी नोंकझोंक हुई तो सत्ता पक्ष के विधायकों ने कुर्मी के लिए अभद्र और बंदर जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। वहीं हो-हल्ले के बीच कुत्ते भौंकते हैं, जैसे शब्द भी सुने गए। इससे विधानसभा अध्यक्ष हितेंद्रनाथ गोस्वामी काफी आहत हुए।
उन्होंने कहा कि हम भद्र लोग हैं। सदन में गाली-गलौज करने के बजाय बाहर की बैठकों में जाकर करें। आप लोग इस तरह करेंगे तो मैं सदन को स्थगित कर दूंगा। इससे क्या अच्छी चर्चा हो पाएगी। हम अच्छी चर्चा के जरिए क्यों नहीं एक उदाहरण पेश करते। मेघालय विधानसभा ने चर्चा के मामले में उदाहरण पेश किया। अध्यक्ष ने सारे आपत्तिजनक शब्दों को सदन की कार्यवाही से निकालने का एलान किया।
मालूम हो कि विधायक कुर्मी ने अपने सवाल में पूछा था कि उनके विधानसभा क्षेत्र में शिक्षकों के अभाव के चलते बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। मैं मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हूं। इस पर शिक्षा मंत्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने कहा कि उत्तर को अच्छी तरह पढ़िए। अदालत में मामला रहने के कारण हम शिक्षक नियुक्ति नहीं कर पाए थे।
24 सितबंर को अदालत ने हमारे पक्ष में फैसला सुनाया है। हम अब शिक्षकों की नियुक्ति को पूरा करेंगे। इस पर कुर्मी ने पूछा कि शिक्षा वर्ष कब से शुरू हुआ है, मुझे पता है, पर मैं मंत्री से जानना चाहता हूं। इस पर मंत्री गुस्से में आ गये । सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी कुर्मी पर टीका-टिप्पणियां शुरू कर दी और फिर असंसदीय भाषाओं का प्रयोग हुआ । पर अध्यक्ष ने हस्तक्षेप कर मामले को समाप्त किया ।
Published on:
03 Oct 2018 09:11 pm
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