
Consumer Disputes Redressal Commission
रमाकांत गुप्ता ने अपनी हेल्थ की चिंता करते हुए बीमा पॉलिसी ली। जब पैर फ्रैक्चर हो गया तो 77 हजार रुपए का खर्च आया, लेकिन बीमा कंपनी इलाज के खर्च से मुकर गई। बीमा कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग की शहर लेनी पड़ी। इलाज में खर्च हुए 77 हजार रुपए 6 फीसदी ब्याज व मानसिक क्षति के 2 हजार रुपए अलग से मिले। रमाकांत गुप्ता अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं है, जिन्हें सेवा नहीं मिली। ग्वालियर में 23 हजार 210 लोग अलग-अलग कंपनियों की सेवाओं से न खुश रहे और उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग (उपभोक्ता फोरम) की शरण ली। यदि अंचल के 8 जिलों की स्थिति देखी जाए तो 70 हजार 940 लोगों ने फोरम का दरवाजा खटखटाया है। बीमा, बिजली, फाइनेंस, हेल्थ, इलेक्ट्रोनिक क्षेत्र में सेवाएं देने वाली कंपनियों से लोग न खुश हैं। इन्होंने उपभोक्ता को जो गारंटी व वारंट दी, उसे पूरा नहीं किया। बीमा कंपनियों के खिलाफ 40 फीसदी केस आए हैं।
- बीमा कंपनियों ने इलाज के खर्च के भुगतान से बचने के लिए कागजों में छोटी-छोटी कमियां बताई। घर पर भी इलाज किया जा सकता था। अस्पताल उनकी सूची में नहीं है। दस्तावेज सही से नहीं भरे हैं।
- बिजली कंपनी के गलत बिलिंग की शिकायतें फोरम में पहुंची हैं। मीटर तेज भागना, सही रीडिंग नहीं लेना की शिकायतें उपभोक्ता ने की।
- अस्पताल के गलत इलाज का आरोप लगाते हुए फोरम में पहुंचे।
- इलेक्ट्रोनिक सामान की वारंटी के दौरान खराब हो गया, लेकिन कंपनी ने उन्हें सुधार नहीं। मोबाइल, एलईडी, लैपटॉप की शिकायतों के लेकर लोगों शिकायत उपभोक्ता फोरम में की।
- फायनेंस में चिटफंड कंपनी व बैकों की सेवाओं के मामले आए हैं।
केस-1: राकेश जैन ने सत्येंद्र सिंह को मकान के मरम्मत का ठेका दिया। मरम्मत कार्य 1 लाख 72 हजार रुपए में किया जाना था, लेकिन ठेकेदार ने पूरा काम नहीं किया। इसके चलते राकेश जैन ने फोरम में वाद दायर किया। फोरम ने माना कि 10 हजार रुपए काम पूरा नहीं किया। फोरम ने 10 हजार रुपए लौटाने का आदेश दिया।
केस-2: रामनिवास कुशवाह ने केएमजे चिटफंड कंपनी में पैसा निवेश किया, लेकिन कंपनी ने पैसा नहीं दिया तो उपभोक्ता फोरम में वाद पेश किया। फोरम ने सेवा में कमी मानते हुए 30 हजार रुपए ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिया। मानसिक क्षति व केस लडऩे के 2 हजार रुपए अलग से देने होंगे।
जिला प्रकरण
ग्वालियर 23210
शिवपुरी 11084
गुना 10865
अशोकनगर 2365
दतिया 5821
भिंड 6175
मुरैना 9162
श्योपुर 2258
(पिछले पांच साल में दर्ज हुए केसों का फोरम ने किया है निराकरण)
एक्सपर्ट
- लोग अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हुए हैं। यदि कोई कंपनी सेवा नहीं देती है तो उसके खिलाफ लोग फोरम में आए हैं। इस कारण पिछले पांच साल में केसों की संख्या बढ़ी है। फोरम की वेबसाइट पर शिकायत ऑनलाइन भी कर सकते हैं।
अवधेश सिंह तोमर, अधिवक्ता
Published on:
22 Aug 2025 11:14 am
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