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बिना कारण बैंक खाता फ्रीज करना गलत: हाईकोर्ट ने पुलिस का आदेश किया स्थगित

12.20 लाख रुपए जमा हैं खाते में, 17 लाख की एफडी भी है संलग्न

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12.20 लाख रुपए जमा हैं खाते में, 17 लाख की एफडी भी है संलग्न

12.20 लाख रुपए जमा हैं खाते में, 17 लाख की एफडी भी है संलग्न

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पुलिस अधीक्षक भिंड द्वारा जारी उस पत्र पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके आधार पर याचिकाकर्ता का बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया था। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बिना ठोस कारण बताए किसी नागरिक के खाते पर रोक लगाना उचित नहीं है।

यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक जैन ने हनी सिंह भदौरिया बनाम मध्यप्रदेश शासन व अन्य में पारित किया गया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस अधीक्षक, भिंड द्वारा 11 दिसंबर 2025 को जारी पत्र के आधार पर बैंक ने खाते को होल्ड कर दिया। इस खाते में लगभग 12.20 लाख रुपए की राशि जमा थी, जिसे याचिकाकर्ता ने अपनी मेहनत की कमाई बताया। इसके अलावा 17 लाख रुपए की एफडीआर भी संलग्न कर दी गई। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि पुलिस अधीक्षक के पत्र में खाता फ्रीज करने का कोई कारण नहीं बताया गया, इसके बावजूद बैंक ने डेबिट पर रोक लगा दी। इस स्थिति में याचिकाकर्ता को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मामले पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी पत्र और बैंक की ओर से की गई उससे जुड़ी कार्रवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता के खाते में कोई संदिग्ध लेन-देन पाया जाता है, तो संबंधित पुलिस अधिकारी बैंक को नया पत्र भेज सकते हैं। लेकिन ऐसी स्थिति में खाता फ्रीज करने की कार्रवाई केवल संदिग्ध राशि तक ही सीमित होगी, पूरे खाते पर नहीं।