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जनसुनवाई में पहुंचे 60 लोग, बोले- ‘साहब… हम मरे हुए लोग हैं’, अफसर भी रह गए दंग, चौंका देगी वजह

3 परिवारों के 60 लोगों को मृत बताकर रिश्तेदारों ने हड़प ली जमीन, जनसुनवाई में पहुंचे पीड़ित की बात सुनकर अधिकारी भी रह गए दंग।

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जनसुनवाई में पहुंचे 60 लोग, बोले- 'साहब... हम मरे हुए लोग हैं', अफसर भी रह गए दंग, चौंका देगी वजह

मध्य प्रदेश के ग्वालियर कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में एक हैरान कर देने वाला अजीबो गरीब मामला सामने आया है। वजह ये था कि, कलेक्टर की जनसुनवाई में मरे हुए लोग पहुंचे। जनसुनवाई के दौरान लोगों की समस्याएं सुनने बैठे अफसरों के सामने जब उन्होंने कहा कि, 'साहब... हम सब मरे हुए लोग हैं' तो अफसर भी दंग रह गए। क्योंकि, अधिकारियों से ये बात कहने वाले कोई एक या दो नहीं, बल्कि तीन परिवारों के 60 सदस्य थे। पीड़ितों ने कहा कि, उनके रिश्तेदारों ने राजस्व कर्मचारियों से साठगाठ कर मृत होने के दस्तावेज बनवाकर उन्हें मृत घोषित करवा दिया। इसी के साथ उनकी जमीन हड़प ली है।

दरअसल, मुरार इलाके के अंतर्गत आने वाले जारगा गांव में रहने वाले एक सपेरा परिवार के कुछ लोग कलेक्टर की जनसुनवाई पहुंचे थे। जहां उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि, उन्हें सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया है। वो सभी खुद को जीवित साबित करने के लिए यहां आए हैं। उन्होंने अफसरों को बताया कि, पहले वो मुरार ब्लॉक के मिर्धा खेरिया गांव में रहते थे। लेकिन कुछ वर्षों से वो अपने गांव को छोड़कर दूसरे गांव जारगा में बसे हुए हैं। इसी बीच उनके रिश्तेदारों ने प्रशासनिक अफसरों से साठगाठ कर दस्तावेजों पर उन्हें मृत घोषित करवा दिया और उनकी जमीन जो शासन द्वारा दी गई थी, उसे हड़प लिया है।

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'एक या दो नहीं, कागजों पर 60 लोगों को मार डाला'

पीड़ितों ने ये भी बताया कि, कागजों में उनके परिवार के एक या दो नहीं, बल्कि तीन परिवारों के 60 से ज्यादा लोगों को मरा हुआ घोषित किया गया है। यानी की असल में तो वो लोग जीवित हैं, पर सरकारी कागजों पर उन्हें मृतक माना जा रहा है। जब उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी उन्हें लगी तो वो भी हैरान रह गए। यही वजह है कि, वो अपने आप को जिंदा साबित करने के लिए कलेक्टर कार्यालय आए हैं। उन्होंने अफसरों से मांग की है कि, कहा कि वह जिंदा है और उन्हें जो शासन ने भूमि आवंटित की थी उस पर से कब्जा हटवाकर दिलाई जाए।

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अफसरों से मिला मदद का आश्वासन

वहीं सपेरा जाति के इस परिवार की मांग पर प्रशासन का कहना है कि शिकायतकर्ता परिवार ने भूमि संबंधित कोई प्रमाणित दस्तावेज नहीं दिखाया है, लेकिन मामला सामने आने पर उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों को भेजकर जांच करा कर मदद का आश्वासन दिया है।