
MP News: हाईकोर्ट की एकल पीठ ने तीन पुलिसकर्मियों की समझौते के आधार पर छेड़छाड़ की एफआइआर निरस्त करने की दायर याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा- पुलिस अनुशासित बल है। भर्ती के समय अभ्यर्थी के चरित्र की जांच कर आपराधिक रेकॉर्ड देखा जाता है।
यदि पुलिस विभाग को लगता है कि चरित्र संदिग्ध है, आपराधिक पृष्ठभूमि है, इस आधार पर उम्मीदवारी खारिज की जाती है। अब विचारणीय प्रश्न है कि पुलिस में भर्ती होने के बाद पुलिसकर्मी ऐसी गतिविधियों में शामिल होते हैं, जिसमें जबरन शारीरिक संबंध बनाने की मांग करते हैं। क्या ऐसे पुलिसकर्मी को बर्दाश्त किया जा सकता है।
कोर्ट ने मामला पुलिस महानिदेशक को भेजा है। दरअसल, आशुतोष सिकरवार, रामकृष्ण गुर्जर, नरेंद्र सिंह रसक ने छेड़छाड़ और मारपीट की एफआइआर निरस्त करने के लिए याचिका दायर की थी। तर्क दिया कि पीड़िता ने समझौता कर लिया है।
मुरैना के ट्रैफिक थाने के आरक्षक आशुतोष सिकरवार, रामकृष्ण गुर्जर, नरेंद्र सिंह 26 मार्च 2024 को सिटी सेंटर के स्पा सेंटर में जबरन घुसे। कहा, मुझे शारीरिक संबंध बनाना है, बदले में 2000 रुपए देंगे। विरोध पर संचालक को पीटा। वे पुलिस की वर्दी में थे। महिलाकर्मी को थप्पड़ मारा। महिला ने विवि थाने में छेड़छाड़ व मारपीट का केस दर्ज कराया था।
Published on:
14 Apr 2025 03:09 pm
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