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सत्ता की ताकत: कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कुर्सी पर काबिज SADA और GDA अध्यक्ष

सत्ता की ताकत: कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कुर्सी पर काबिज SADA और GDA अध्यक्ष

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सत्ता की ताकत: कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कुर्सी पर काबिज SADA और GDA अध्यक्ष

ग्वालियर। ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए) और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) की योजनाओं का करोड़ों रुपए का फंड पांच दिनों से अनधिकृत अध्यक्षों के हाथों में है। दोनों प्राधिकरणों के अध्यक्षों का कार्यकाल वैधानिक रूप से 24 अगस्त को समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद साडा अध्यक्ष राकेश जादौन और जीडीए अध्यक्ष अभय चौधरी पद पर काबिज हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ बिल्डर्स और गृह निर्माण समितियों को फायदा पहुंचाने के लिए बैक डेट में फाइलों पर दस्तखत किए जा रहे हैं। करोड़ों की फाइलें आनन-फानन में निपटाई जा रही हैं। कार्यकाल पूरा कर चुके दोनों अध्यक्ष सभी सरकारी सुविधाओं का फायदा भी ले रहे हैं। शासन इस गफलत पर आंखें मूंदे हुए है।

पार्टी भी अनजान
जादौन और चौधरी भाजपा नेता हैं। लगता है भाजपा को भी भनक नहीं कि दोनों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। पार्टी लाइन के अनुसार संवैधानिक पद पर कार्यकाल पूरा कर चुके पदाधिकारी के नाम से पहले पूर्व लगाया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद बुधवार को हुई भाजपा की बैठक में भी चौधरी और जादौन के लिए अध्यक्ष पदनाम का इस्तेमाल किया गया। प्राधिकरणों के अध्यक्ष को लगभग 4 हजार रुपए मानदेय और लगभग 5 हजार रुपए भत्ता मिलता है। इसके बावजूद नेता इस पद का मोह नहीं छोड़ पाते।

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फाइल सीएम के यहां
सूत्रों के अनुसार ग्वालियर सहित प्रदेश के पांच अन्य प्राधिकरणों के अध्यक्षों का कार्यकाल भी समाप्त हो गया है। इनका कार्यकाल बढ़ाने की सिफारिश भाजपा नेतृत्व ने की है। फाइल मुख्यमंत्री के पास लंबित है। सहमति मिल गई तो कार्यकाल जनवरी तक बढ़ाया जा सकता है।

यह है आदेश
मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश नियम 1975 के नियम के अंतर्गत 24 अगस्त 2015 को राज्य शासन ने तीन साल के लिए राकेश जादौन को साडा और अभय चौधरी को जीडीए का अध्यक्ष नियुक्त (मनोनीत) किया था। इनका कार्यकाल तीन साल का था। यह अवधि 24 अगस्त 2018 को पूरी हो चुकी है। साडा की स्थापना के बाद से 2011 तक अध्यक्ष का कार्यकाल 4 वर्ष निर्धारित था। सितंबर 2012 में राजपत्र के माध्यम से प्राधिकरणों के अध्यक्ष का कार्यकाल घटाकर 3 वर्ष कर दिया गया था। हालांकि, पूर्व साडा अध्यक्ष जयसिंह कुशवाह को दो बार एक्सटेंशन मिला था। निवर्तमान अध्यक्ष को न तो अब तक एक्स्टेंशन की बात सामने आई है न ही उनकी जगह किसी और को मनोनीत किया गया है। जीडीए में भी यही स्थिति है। प्रावधान है कि यदि कार्यकाल पूरा होने तक नया मनोनयन नहीं होता तो साडा का प्रभार संभागायुक्त और जीडीए का प्रभार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को सौंप दिया जाना चाहिए।

प्राधिकरणों का कार्यकाल खत्म होने की अभी हमारे पास कोई जानकारी नहीं आई है। मैं दो दिन से भोपाल में था। अगर कुछ आया होगा तो दिखवाता हूं।
-बीएम शर्मा, संभागायुक्त

&मुझे इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है। पूरी जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह सकती हूं।
-मायासिंह, मंत्री, नगर प्रशासन एवं नगरीय आवास