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घूस दो तभी होगा काम! राजस्व और निगम में रिश्वत का खेल, 19 महीने में 34 घूसखोर पकड़ाए

Bribe Racket Revenue : राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा 18 और नगर निगम में 5 कर्मचारी-अधिकारी गिरफ्तार किए गए हैं। निगम के घूसखोरों ने अपनो को भी नहीं बख्शा।
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Bribe Racket Revenue

Bribe Racket Revenue (राजस्व और निगम में रिश्वत का खेल Photo Source- Patrika)

Gwalior News :मध्य प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में काम के बदले पैसा देने का चलन थम नहीं रहा है। ग्वालियर का राजस्व विभाग और नगर निगम तो काम से ज्यादा अधिकारियों के भ्रष्टाचार के लिए चर्चा में हैं। इन दोनों विभागों के तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में चल रही है। दागियों में पूर्व महापौर से लेकर पूर्व कमिश्नर तक शामिल हैं। उसके बाद भी इन महकमों में रिश्वतखोरी का खेल खुलेआम चल रहा है।

लोकायुक्त पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले 19 महीने (1 जनवरी 2025 से 31 जुलाई 2026 तक) नौ सरकारी महकमों में 34 अधिकारी और कर्मचारी घूस लेते पकड़े गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 18 घूसखोर राजस्व विभाग में और दूसरे नंबर पर 5 नगर निगम में पकड़े गए हैं। इनके खिलाफ आई शिकायतों से खुलासा हुआ है कि घूसखोरों ने सीमांकन, नामांतरण और नाम संशोधन के बदले पैसे मांगने की रही हैं।

इन कामों के बदले में सीधा पैसा मांगा गया है और जब तक पैसा नहीं मिला, जरूरतमंदों की फाइल बस्तों में बंद रही है। जब पैसा दिए बिना काम नहीं हुआ, तब पीड़ितों ने शिकायतें कीं और घूसखोर पकड़े गए। रिश्वतखोरी के खेल में महिला कर्मचारी भी शामिल रही हैं। नगर निगम में तो घूसखोरों ने अपनों को भी नहीं बख्शा है, उनकी फाइल पर घूस वसूल कर ही मुहर लगाई है।

यह घूसखोर भी पकड़े

-19 जून: हल्का पटवारी रेखा पत्नी कृष्णकांत शाक्य 15 हजार रुपए की घूस लेते पकड़ी गई। मंशाराम निवासी सिरसौद ने शिकायत की थी कि, रेखा ने उनकी बहन की जमीन के सीमांकन और पत्नी सावित्रीबाई के नाम जमीन का नामांतरण करने के बदले में 15 हजार रुपए घूस मांगी थी। पहली किश्त में 3500 रुपए लिए थे।

-20 मई: मालनपुर में पटवारी हिमांशु तोमर ने किसान से जमीन के सीमांकन के बदले 8 हजार रुपए रिश्वत मांगी। पहली किश्त में 6 हजार रुपए लेते रंगे हाथ पकड़े गए।

-8 जनवरी 2025: राममोहन गुर्जर की शिकायत पर सुनील शर्मा नामांतरण के बदले 8 हजार रुपए रिश्वत मांग रहा था। 6 हजार रुपए ले चुका था, दूसरी किश्त में रंगे हाथ पकड़ा।

-6 अक्टूबर 2025: पटवारी अमन शर्मा ने किसान संजय सिंह से नाम संशोधन के एवज में 42 हजार रुपए मांगे। 14 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा।

-20 फरवरी 2025: पिछोर में पटवारी दिग्विजय ङ्क्षसह को लोकायुक्त पुलिस ने किसान शंकर लोधी से जमीन नामांतरण के बदले 25 हजार रुपए मांगने पर पकड़ा। दो हजार रुपए एडवांस लिया, 23 हजार रुपए वसूलते हुए रंगे हाथ पकड़ा।

-1 जून 2026: पेट्रोल पंप संचालक से 27 हजार 500 रुपए घूस वसूलते नापतौल निरीक्षक सौरभ शर्मा रंगे हाथ पकड़े गए।

अपने विभाग में ऐंठी घूस

-नगर निगम के एई सुशील कटारे को लोकायुक्त पुलिस ने ठेकेदार सचिन पचौरी से छह हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा। एई कटारे दूसरे दिन रिटायर होने वाले थे। सचिन पचौरी के पिता प्रेम पचौरी भी नगर निगम से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।

-नगर निगम के बाबू राजेश सक्सेना को 11 महीने पहले लोकायुक्त पुलिस ने वर्षा घंघेट से 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा। वर्षा के पिता पूरन बाल्मीकि भी नगर निगम में पदस्थ थे। उनकी मृत्यु के बाद वर्षा को अनुकंपा नियुक्ति मिलनी थी। उसी फाइल को आगे बढ़ाने के बदले राजेश ने रिश्वत मांगी थी।

घूसखोरों पर कार्रवाई

ग्वालियर लोकायुक्त एसपी निरंजन शर्मा का कहना है कि, सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आने पर लोकायुक्त पुलिस ने कई कार्रवाई की हैं। पिछले कुछ महीनों में राजस्व विभाग में घूसखोरी की शिकायतें ज्यादा आई हैं। उसके अलावा नगर निगम में भी रिश्वत मांगने की शिकायतें दूसरे नंबर पर रही हैं। इन मामलों में पकड़े गए आरोपियों पर कार्रवाई की गई है।