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छात्रों द्वारा जज की कार छीनने का मामला : ABVP ने किया डकैती का केस दर्ज होने का विरोध, NSUI ने किया समर्थन

एबीवीपी के दो छात्रों पर डकैती का केस दर्ज होने के बाद प्रदेशभर में एबीवीपी ने प्रदर्शन शुरु कर दिया है। इसपर एनएसयूआई छात्रों ने भी समर्थन करते हुए सोमवार रो विरोध प्रदर्शन की बाक कही है।

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छात्रों द्वारा जज की कार छीनने का मामला : ABVP ने किया डकैती का केस दर्ज होने का विरोध, NSUI ने किया समर्थन

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हाईकोर्ट के जज की कार छीनकर बीमार कुलपति को अस्पताल पहुंचाने वाले छात्रों पर डकैती का केस दर्ज होने का मामला अब तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। बता दें कि ग्वालियर में एबीवीपी के दो छात्रों पर इस मामले में डकैती का केस दर्ज किया गया है। केस दर्ज होने के बाद प्रदेशभर में एबीवीपी के छात्रों द्वारा प्रदर्शन शुरु कर दिया है। इसी के चलते ग्वालियर के सरकारी महाविद्यालय को एक घंटे तक शांतिपूर्ण तरीके से बंद भी कराया गया।

बता दें कि मामले पर छात्रों पर दर्ज हुआ मुकदमा वापस लेने और निष्पक्ष जांच की मांग कराने को लेकर एबीवीपी द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। एबीवीपी का कहना है कि बॉइस चांसलर की जान बचाने के लिए हाईकोर्ट के जज की गाड़ी छीनी गई थी। हालांकि, इस मामले में एबीवीपी का विरोधी छात्र संगठन एनएसयूआई भी एबीवीपी का इस मामले में समर्थन कर रहा है। सोमवार से दोनों छात्र हिमांशु श्रोत्रिय और सुकृत शर्मा को न्याय दिलाने के लिए ग्वालियर में एनएसयूआई द्वारा भी प्रदर्शन किया जाएगा। एनएसयूआई के अनुसार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एनएसयूआई की विचारधारा अलग है, लेकिन मकसद सिर्फ छात्र सेवा है।

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एबीवीपी की सफाई

ग्वालियर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दो सदस्यों पर हाई कोर्ट के एक जज की कार लूट का आरोप लगा है। इस संबंध में डकैती की धाराओं के तहत केस भी दर्ज किया गया है। इधर विरोध प्रदर्शन कर रहे एबीवीपी छात्रों की मानें तो दोनों छात्रों ने वीसी की जान बचाने के लिए कार का उपयोग किया था, उसके साथ किसी तरह की लूट करने के उद्देश्य से नहीं। इधर, मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल ने बताया कि मामले में शिकायत की गई थी। उसी के आधार पर प्रकरण दर्ज हुआ है।


पुलिस ने कार के साथ दोनों छात्रों को पकड़ा

मामला पड़ाव पुलिस स्टेशन का है। जहां पड़ाव पुलिस को एक कार चालाक ने फोन कर सूचना दी कि दो लोग उसकी कार छीनकर भाग गए हैं। कार हाईकोर्ट के जज की है। जानकारी के बाद तत्काल पुलिस एक्शन मोड में आई और कार को एक अस्पताल से बरामद किया। साथ ही हिमांशु श्रोतीय और सुकृत शर्मा को कार के साथ हिरासत में लिया। आरोपियों के खिलाफ लूट का केस दर्ज किया गया।

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सीएम मोहन ने लिया संज्ञान

इधर मामले में अब मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने इस संबंध में दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। सीएम मोहन ने अनधिकृत रूप से किसी के वाहन के उपयोग और युवकों पर की गई कार्रवाई के संबंध में जांच के निर्देश दिए हैं। सीएम ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि युवकों पर डकैती की धारा लगाना न्यायोचित नहीं लगता, क्योंकि युवक आपराधिक पृष्ठभूमि से नहीं हैं। ये मानवीय संवेदनाओं का मामला है। सीएम यादव ने कहा कि मेरे संज्ञान में ये बात आई है। ये सही है कि युवकों का तरीका गलत था। लेकिन, संपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए जांच के बाद न्यायपूर्ण कार्रवाई होना उचित होगा।

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पूर्व सीएम ने भी चीफ जस्टिस को लिखा है पत्र

इससे एक दिन पूर्व मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर छात्रों की मंशा संझने की अपील की थी। उन्होंने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए चीफ जस्टिस से कहा था कि 'इसे अपराध की श्रेणी में न लें, क्योंकि कार छीनने का उद्दैश्य डकैती करना नहीं बल्कि जंदी और मौत से जंग लड़ रहे वॉइस चांसलर की जान बचाना था।' यहां शिवराज सिंह चौहान ने छात्रों को माफ करने की अपील करते हुए दर्ज कराया गया केस वापस लेने का अनुरोध किया था।