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किराये के मकानों में चली चिटफंड कंपनी, अब रुपए लौटाने का संकट

जिला प्रशासन ने चिटफंड कंपनियों के निवेशकों के रुपये लौटाने के लिए बड्स एक्ट 2019 के तहत सक्षम अधिकारी नियुक्त करने का दूसरी बार प्रस्ताव भेजा है, लेकिन निवेशकों...

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किराये के मकानों में चली चिटफंड कंपनी, अब रुपए लौटाने का संकट

ग्वालियर. जिला प्रशासन ने चिटफंड कंपनियों के निवेशकों के रुपये लौटाने के लिए बड्स एक्ट 2019 के तहत सक्षम अधिकारी नियुक्त करने का दूसरी बार प्रस्ताव भेजा है, लेकिन निवेशकों को रुपया कैसे वापस मिल सकते उसका सबसे बड़ा संकट है, क्योंकि कंपनियों के खातों में रुपये नहीं है। नीलामी के लिए संपत्तियां भी नहीं है। ये किराये के मकानों में चल रही थी।
जिला प्रशासन ने 2011 से 2012 के बीच 33 कंपनियों पर र्कारवाई की थी। उसके बाद जो चिटफंड कंपनियां सामने आईं, उन पर कार्रवाई जारी रखी। परिवार डेयरी के निवेशकों को छोड़ दूसरी कंपनियों के निवेशकों को रुपये नहीं मिले। वर्ष 2019 में बड्स एक्ट 2019 पारित किया गया। इस एक्ट के तहत निवेशकों को रुपये लौटाने के लिए समक्ष अधिकारी नियुक्त किया जाना है। चिटफंड कंपनियों में निवेश करने वाले निवेशकों ने ठग पीडि़त जमाकर्ता परिवार के नाम से संगठन भी बनाया है। ये सक्षम अधिकारी नियुक्त करने की मांग कर रहे हैं। ताकि रुपये वापसी के लिए आवेदन पेश कर सकें।


केएमजे की संपत्ति की बोली लगाने वालों ने वापस लिए रुपए
जिला प्रशासन ने केएमजे चिटफंड कंपनी के निवेशकों को रुपये लौटाने के लिए 63 संपत्तियों की नीलामी निकाली थी। खरीददारों ने नीलामी के लिए बोली भी लगाई और धरोहर राशि भी जमा कर दी। नीलामी से जो रुपया आता, उससे निवेशकों को रुपये लौटाए जाते। लेकिन हाईकोर्ट से नीलामी पर रोक लग गई, जिसके चलते खरीददारों ने अपनी बोली की धरोहर राशि वापस ले ली।


रुपए लौटाने में ये आ रही दिक्कतें
- परिवार डेयरी, केएमजे, समक्ष डेयरी की संपत्तियां अटैच हैं।
- परिवार डेयरी की संपत्तियां चैन्नई हाईकोर्ट के बाद पर सीबीआई ने अटैच कर ली, लेकिन प्रशासन ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की है, इस याचिका पर फैसला नहीं सका है।
- 50 से अधिक कंपनियों ने ग्वालियर में अपने आफिस खोले थे, लेकिन अधिकतर कंपनियां किराये मकान में संचालित थी। जब इनके ऊपर कार्रवाई की गई, तब खातों में भी रुपये नहीं थे।
- पीडि़त आवेदन देकर चले जाते हैं, लेकिन आगे की कार्रवाई नहीं हो रही है। क्योंकि बड्स एक्ट के तहत सक्षम अधिकारी नियुक्त हैं और न कोर्ट कमिश्नर।
- कंपनियों का पूरा रिकार्ड भी नहीं है।


इनका कहना है
बड्स एक्ट के तहत सक्षम अधिकारी नियुक्त करने के लिए दुबारा प्रस्ताव भेजा है। रुपये लौटाने में सबसे बड़ी समस्या फंड की आ रही है। क्योंकि कंपनियां किराये के कमरों में संचालित थीं।
एचबी शर्मा, अपर कलेक्टर