6 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अजय सिंह बोले- प्रदेश अध्यक्ष के लिए सबसे उपयुक्त हैं गोविंद सिंह, मंत्री बोले- मुझे कोई नहीं बनाएगा

अजय सिंह ने कहा कि मेरे नाम पर भी चर्चा होते रहती हैं, लेकिन मैं इस रेस में नहीं हूं
2 min read
Google source verification
99.jpg

ग्वालियर/ मध्यप्रदेश में कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए एक बार फिर से दावेदारी शुरू हो गई है। कांतिलाल भूरिया की जीत के बाद मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने उन्हें ही प्रबल दावेदार बताया था। इसके साथ ही सिंधिया खेमा अलग दावेदारी जता रहा है। बीच-बीच में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह के नाम पर भी चर्चा होती है। लेकिन शुक्रवार को उन्होंने ग्वालियर में खुद को इस रेस से अलग बताया है। लेकिन उन्हें मंत्री गोविंद सिंह का नाम सुझाया है।

ग्वालियर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे अजय सिंह ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए मीडिया में रोज नए-नए नाम चलते रहते हैं। मैं भी कभी-कभी उसी लिस्ट में आ जाता हूं। जब उनसे पूछा गया कि आप किसे चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि मैं उसे ही चाहता हूं, जिस पर सोनिया गांधी की सील मुहर लगे। इसके बाद उन्होंने बगल में खड़े सहाकारिता मंत्री गोविंद सिंह को सबसे उपयुक्त व्यक्ति इस पद के लिए बताया।

गोविंद सिंह ने दिया ये जवाब
अजय सिंह की बात पर गोविंद सिंह ने कहा कि न मैं पहले कोई दावेदार था और न ही अब हूं। इसके साथ ही गोविंद सिंह ने यह भी कहा कि न ही मुझे कोई बनाने वाला है। उन्होंने कहा कि यह सब हमारे अधिकार क्षेत्र की बात नहीं है। ये सब कुछ हाई कमान को तय करना है। दरअसल, दोनों नेता ग्वालियर में आयोजित राजपूत हितकारिणी सभा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे थे।


कई नामों की चर्चा
दरअसल, मध्यप्रदेश लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद से ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के लिए दावेदारी शुरू हो गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक सिंधिया को सबसे प्रबल दावेदार बता रहे हैं। जबकि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का खेमा बीच-बीच में अलग-अलग नामों को प्रोजेक्ट करते रहती है। कुछ महीने पहले मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने गृह मंत्री बाला बच्चन का नाम आगे बढ़ाया था। फिर कांतिलाल भूरिया का नाम आगे किया। सज्जन सिंह वर्मा सीएम कमलनाथ के करीबी माने जाते हैं।


फैसला दिल्ली को करना है
मध्यप्रदेश कांग्रेस शुरू से ही गुटबाजी की शिकार रही है। लोकसभा चुनावों में भी प्रदेश में गुटबाजी खुलकर देखने को मिली थी। झाबुआ उपचुनाव में भी गुटबाजी दिखी। ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव के दौरान मध्यप्रदेश के दूसरे हिस्से में तो सक्रिय रहे लेकिन झाबुआ में चुनाव प्रचार के लिए नहीं गए। प्रदेश अध्यक्ष के लिए दावेदारी तीनों गुट के लोग जता रहे हैं। लेकिन इन गुटों के मुखिया से जब भी पूछा जाता है तो जवाब होता है कि दिल्ली तय करेगा। इनके लोग प्रदेश में लगातार कुर्सी के लिए दावेदादी जता रहे हैं।