
खाद्य सुरक्षा विभाग के दल ने बुधवार को दो मसाला फैक्ट्री पर छापामार कार्रवाई की। दाना ओली की फैक्ट्री से सैंपल लिए गए, लेकिन दाल बाजार स्थित महामाया पिसाई केंद्र (मसाला फैक्ट्री) रंग, लकड़ी, चावल की भूसी बरामद की। लकड़ी व चावल की भूसी को धनिया में मिलाया जा रहा था, जबकि रंगों को मिर्ची, हल्दी में मिलाकर बेचा जा रहा था। टीम ने सैंपल लेने के बाद महामाया पिसाई केंद्र को सील कर दिया।
खाद्य विभाग की टीम को मसाला फैक्ट्री (पिसाई केंद्र) पर मिलावट की सूचना मिली थी। इस सूचना पर खाद्य निरीक्षक लोकेंद्र सिंह के नेतृत्व में दल ग्वालियर गृह उद्योग दानाओली पहुंचा। इस पिसाई केंद्र की जांच की। यहां पर मिलावट का सामान नहीं मिला, लेकिन मसालों के सैंपल लिए गए। इसके दाल बाजार के महामाया पिसाई केंद्र पहुंचे। यहां पर मसालों में मिलाए जाने वाला सामान रखा हुआ था। धनिया, हल्दी में लकड़ी पीसकर मिलाई जाती थी, उसका रंग गहरा करने के लिए धनिया में हरा रंग व हल्दी में पीला रंग मिलाया जाता था। मिर्ची में लाल रंग मिलाया जा रहा था। इसके अलावा ऑरेंज रंग भी बरामद किया। ये रंग भी मसालों में मिलाया जाता था। इस केंद्र मिलावटी मसाले तैयार कर बाजार में बेचे जाते थे। यहां से 60 हजार के मसाले बरामद किए। केंद्र को सील कर दिया। सैंपल लेने के बाद इन्हें जांच के लिए भोपाल भेजा जाएगा।
ऐसे पहचानें मिलावटी मसाला
खाद्य निरीक्षक लोकेंद्र सिंह का कहना है कि मिलावटी मसालों की पहचान के लिए घरेलू तरीका है। यदि पिसी मिर्ची की शुद्धता घर पर जांच करना चाहते हैं तो उसे पानी में घोले। यदि रंग मिला है तो पानी का रंग लाल हो जाएगा। यदि रंग नहीं मिला है तो मिर्ची पानी में बैठ जाएगी। पानी का रंग नहीं बदलेगा। ऐसे ही हल्दी व धनिया का भी टेस्ट कर सकते हैं।
एक्सपर्ट
मसालों में धूल, लकड़ी, भूसी, रंग आदि की मिलावट है तो वह स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। मिलावटी मसाले खाने पर पेट में छाले होना। दर्द व गैस की समस्या होती है। यदि इसका लंबे समय तक सेवन किया जाता है तो लीवर कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है। इसलिए मिलावटी मसालों के सेवन से बचना चाहिए।
- डाॅ. अजय पाल सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर जीआरएमसी
Updated on:
11 Jan 2024 11:52 am
Published on:
11 Jan 2024 09:49 am
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