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CRIME YEAR ENDER 2017: महिलाओं पर बढ़े अपराध सुरक्षा के दावे खोखले

शहर में आए दिन हो रहे सनसनी खेज अपराधों ने महिलाओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, जिसके चलते अब महिलाएं घर से निकलने से पहले दस बार सोचती हैं

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crime with women

ग्वालियर। शहर में आए दिन हो रहे सनसनी खेज अपराधों ने महिलाओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, जिसके चलते अब महिलाएं घर से निकलने से पहले दस बार सोचती हैं। शहर की पॉश कॉलनी हो या फिर भरा बाजार, हर जगह दहशत गर्द और सिरफिरे लोग जानलेवा वारदातों को अंजाम देकर महिलाओं को शिकार बना रहे हैं। विगत कुछ माह में शहर में सरेआम चेन स्नेचिंग, लूट, छेड़छाड़ व जानलेवा हमलों ने पुलिस सुरक्षा के झूठे दावों की पोल खोल दी है।

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महिलाओं की मानें तो वर्तमान स्थिति ऐसी है जिसमें महिलाएं न तो घर के अंदर सुरक्षित हैं और ना ही घर के बाहर। घर के अंदर भी दहेज के लोभियों और रिश्तों को कलंकित करती घटनाएं अक्सर अखबारों की सुर्खियां बनती रहती हैं। वहीं पिछले कुछ दिनों में अगर नजर डालें तो घर के बाहर के हालात भी अच्छे नहीं हैं। महिलाओं के लिए शहर में डर का माहौल बनता जा रहा हैं, जो पुलिस प्रशासन द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए किए जा रहे सभी वादों को झूठा साबित कर रहा है। वहीं महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर नजर डालें तो इनमें साल दर साल वृद्धि ही हो रही है।

इस माह में अगर नजर डालें तो
पॉश कॉलोनी चेतकपुरी में 20 दिसंबर को शाम करीब 4 बजे सिरफिरे तरुण गोयल ने बीच सड़क पर एक युवती के गले में चाकू घोंप दिया। सहेली ने उसे बचाने की कोशिश की तो तरुण ने उसे भी चाकू मार दिया। इसी माह में किला तलहटी में एक युवती की लाश मिली थी, जिसमें भाई ने आरोप लगाया था कि युवती का मर्डर उसके साथ पढऩे वाले ही दो युवकों ने किया है, जिसकी जांच पुलिस कर रही है।

शहर में महिला पुलिस की दो टीमें हैं गठितलोग बदले अपनी सोच
आज के समय में लोग सेल्फ सेंटर्ड हो चुके जिन्हें किसी का दर्द न सुनाई देता है और ना ही दिखाई। लोगों अपनी सोच में बदलाव करना होगा। क्योंकि अपराधियों की संख्या हमेसा बचाने वालों से कम ही होती है।
इंद्रा मंगल , सचिव, महिला शंति सेना सेल्फडिफेंस को न लें लाइटली

सेल्फ डिफेंस को
हमारे शहर ही नहीं बल्कि देश में भी बहुत लाईटली लिया जाता है। जबकि इसकी आवश्क्ता युवतियों के साथ ही महिलाओं को भी है। कई बार देखा जाता है कि किसी भी घटना के समय हम फ्रीज हो जाते है,जबकि हमें उसमें रिऐक्ट करना चाहिए। फिर भले ही उसके लिए चिल्लाना क्यों न पड़े।
इला बहल, संस्थापक आवहन एक पहल ये समाज का निम्न स्तर है

जो घटनाएं घटित हो रही
हैं वो पूरी तरह से अमानवीय है। जो समाज को निम्नस्तर पर ले जा रही हैं। इस तरह की घटनाओं से साफ जाहिर है कि लोगों की सोच किस स्तर तक पहुंच चुकी है।
नीलम जैन, समाजसेवी मिलनी चाहिए कड़ी सजा

महिलाओं के खिलाफ
अपराध करने वाले लोगों को कानून से कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। जिससे इस तरह का अपराध के विषय में सोचने वालों की रूह भी कांप जाए।
विमलेश चौधरी, समाजसेवी