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World Heritage Week:गूजरी महल में शुरू हुई शिव परिवार पर केन्द्रित शिव नटेश छायाचित्र प्रदर्शनी

-विश्व धरोहर सप्ताह के उपलक्ष्य में लगी प्रदर्शनी का संभाागायुक्त और एडीजी ने किया उद्घाटन

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World Heritage Week:गूजरी महल में शुरू हुई शिव परिवार पर केन्द्रित शिव नटेश छायाचित्र प्रदर्शनी

World Heritage Week:गूजरी महल में शुरू हुई शिव परिवार पर केन्द्रित शिव नटेश छायाचित्र प्रदर्शनी

ग्वालियर। गूजरी महल संग्रहालय मेंं शनिवार को शिव परिवार पर आधारित शिव नटेश छायाचित्र प्रदर्शन की शुरुआत हुई। यह प्रदर्शनी 19 से 25 नवंबर तक आयोजित होगी। विश्व धरोहर सप्ताह के अंतर्गत शुरू हुई प्रदर्शनी का उद्घाटन संभागायुक्त दीपक सिंह और एडीजी डी श्रीनिवास वर्मा ने किया।


19 नवम्बर से 25 नवम्बर 2022 के तहत पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय भोपाल के तत्वावधान में गूजरी महल संग्रहालय ग्वालियर में "शिव नटेश" छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। प्रदर्शनी का शुभारंभ शनिवार को ग्वालियर संभाग के आयुक्त श्री दीपक सिंह एवं एडीजी श्री डी श्रीनिवास वर्मा ने किया।


उप संचालक पुरातत्व अभिलेखागार पी सी महोबिया ने बताया कि पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय भोपाल के तत्वावधान प्रदर्शनी की शुरुआत की गई है। यह प्रदर्शनी दर्शकों के लिए निशुल्क है। छायाचित्र प्रदर्शनी में शिव के विभिन्न स्वरूप और शिव परिवार पर केन्द्रित कांस्य प्रतिमाएं और छायाचित्रोंं का समावेश करके शोधार्थियों के साथ-साथ आम जन को भी दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। उद्घाटन के बाद पहले दिन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं को और सरस्वती शिशु मंदिर बादलगढ़ के छात्र-छात्राओं को प्रदर्शनी दिखाई गई। इसके साथ ही संभागायुक्त और एडीजी ने गूजरी महल संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई शालभंजिका को देखा।


यहां से लिया है कंटेंट
प्रदर्शनी में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश एवं शिव वाहक नंदी की दुर्लभ प्रतिमाओं के छायाचित्र विभागीय संकलन, शोध ग्रंथों व इंटरनेट के माध्यम से लिया गया है। भारत में अधिकांश कांस्य प्रतिमाओं का निर्माण दक्षिण भारत में चोल राजवंश के दौरान किया गया है। इन पर आधारित छायाचित्रों में प्रदर्शित कम्बोडिया की 16 वीं सदी की कार्तिकेय की मयूरासीन प्रतिमा, ऑक्सफोर्ड के अशमोलियन संग्रहालय में रखी 9 वीं सदी की नृत्य गणेश विशेष आकर्षण हैं। इसके अलावा थाईलैण्ड की मानवरूपी कलाकृतियां दर्शनीय हैं। इस प्रदर्शनी में प्रथम, द्वितीय सदी (कुषाण काल) से 20 वीं सदी की प्रतिमाओं के छायाचित्र प्रदर्शित हैं।