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ग्वालियर। जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक मर्यादित भिण्ड के २११ कर्मचारियों की कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ग्वालियर (ईपीएफओ) कार्यालय में जमा कराई गई भविष्य निधि अंशदान की ७४ लाख ९२ हजार ८०६ रुपए की धनराशि अटक गई है। यह धनराशि सिर्फ एक वर्ष (२०१२-१३) के कटोत्रा की है। हैरत की बात यह है कि इतनी बड़ी धनराशि का ईपीएफओ के पास कोई हिसाब-किताब ही उपलब्ध नहीं है। इसका खुलासा हाल में तब हुआ, जब बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने ईपीएफओ से अपनी भविष्य निधि अंशदान की संपूर्ण राशि का भुगतान मांगा और उन्हें २०१२-१३ में हुए ईपीएफ कटोत्रे की धनराशि का भुगतान नहीं हुआ। बैंक को इस गोलमाल की जानकारी मिलने पर अब बैंक ने ईपीएफअेा को वर्ष २०१२-१३ में उसे भेजे गए लगभग ७५ लाख रुपए का ब्यौरा नए सिरे से भिजवाया है और उसे बैंक के सभी कर्मचारियों के ईपीएफ खातों में विधिवत जमा कराए जाने का आग्रह किया है।
पांच साल में ३५ कर्मचारी सेवानिवृत्त, नहीं मिला ईपीएफ का पूरा पैसा
गुजरे पांच साल में वर्ष २०१२ के बाद से अब तक जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक के लगभग ३५ कर्मचारी अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिनको ईपीएफओ द्वारा उक्त एक वर्ष२०१२-१३ की राशि छोड़कर शेष का अंतिम भुगतान कर दिया गया है। ईपीएफओ द्वारा एक वर्ष के रोके गए भुगतान के बारे में किसी भी कर्मचारी और नियेाजक संस्था बैंक को कोई कारण भी नहीं बताया गया है। सेवानिवृत्त हुए कुछ कर्मचारियों द्वारा जब ईपीएफओ से सूचना के अधिकार के तहत इस मामले में जानकारी मांगी गई तब अलग-अलग कर्मचारियों को अलग-अलग गोलमोल जानकारियां दी गईं।
इन लोगों के अटके है रुपए
२०१६ में सेवानिवृत्त हुए लेखापाल श्यामनारायण बाजपेयी को आरटीआई के जवाब में ईपीएफओ ने बताया कि वर्ष २०१२-१३ के दौरान अंशदान की राशि जमा नहीं हुई। सिस्टम पर बैक पीरियड का उक्त समयावधि का डाटा दर्शित नहीं हो रहा है। इसी तरह की जानकारी के जवाब में एक अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारी रामलखन शर्मा व कैलाशनारायण शर्मा को बताया गया कि नियोजक द्वारा वर्ष २०१२-१३ का चालान ईसीआर के माध्यम से जमान करते हुए मैनुअली जमा किया गया है। संस्थान द्वारा ईसीआर टैक्स्ट फाइल भेजने के पश्चात ही खाते में राशि जमा की जा सकेगी।
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उधर नियेाजक संस्था बैंक प्रबंधन का कहना है कि उसने ईपीएफओ को बैंक के सभी कर्मचारियों के वर्ष २०१०-११, २०११-१२ एवं २०१२-१३ की ईपीएफ कटोत्रा की समस्त राशि कर्मचारियों के हार्ड व सॉफ्ट डाटा सहित १४ अक्टूबर २०१४ को भेज दिया गया था, ईपीएफओ ने दो वर्षों का डाटा अपडेट कर लिया लेकिन वर्ष २०१२-१३ का अपडेट नहीं किया, जिससे कर्मचारियोंं को इस वर्ष की भविष्य निधि राशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है। यहां कमाल की बात यह है कि इस अनियिमतता पर ईपीएफओ ने पांच साल तक कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि जब पीडि़त कर्मचारियों ने शिकायत शिकवे शुरू किए तब उसने हफ्ते भर पहले नियोजक संस्था बैंक को एक पत्र लिखा है। यहां बताना जरूरी होगा कि बैंक के सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों में से अब तक लगभग ८ की मौत हो चुकी है, जिनके आश्रितों को इस गड़बड़झाले की कोई जानकारी ही नहीं है।
"ईपीएफओ आफिस को कर्मचारियों की ईपीएफ कटोत्रे का अंशदान नियमित रूप से भेजा जाता है। वर्ष२०१२-१३ का अंशदान वर्ष २०१४ में ही भेज दिया गया था। ईपीएफओ आफिस की लापरवाही से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को परेशानी हो रही है।"
पीके राठौर, प्रभारी महाप्रबंधक जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित भिण्ड
Published on:
27 Dec 2017 06:07 pm
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