
सरकारी स्कूल की ड्रेस वितरण घोटाले में फंसी शिवपुरी की पूर्व कलेक्टर शिल्पा गुप्ता, ये है पूरा मामला
शिवपुरी। जिले में सरकारी स्कूलों में अध्यनरत बच्चों को ड्रेस वितरण के मामले में हुए घोटाले को पत्रिका ने परत दर परत उजागर किया था, परंतु तत्कालीन कलेक्टर पूरे भ्रष्टाचार को मौन सहमति प्रदान कर दबा दिया। इसी क्रम में एडवोकेट राजीव शर्मा ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री सहित भोपाल ईओडब्ल्यू को दर्ज कराई, जिस पर से आर्थिक अपराध अनवेषण ब्यूरो ने तत्कालीन कलेक्टर सहित एसआरएलएम के जिला परियोजना अधिकारी सहित अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कर मामले की विवेचना प्रारंभ कर दी है।
उल्लेखनीय है कि स्व सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से शासन ने शैक्षणिक सत्र 2018-19 में सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को ड्रेस वितरण एसआरएलएम (स्टेट रूरल लाइवहुड मिशन) के माध्यम से कराने का निर्णय लिया। इसी क्रम में शासन ने शासन ने जिले में होने वाली ड्रेस सप्लाई की 80 प्रतिशत राशि एसआरएलएम के खाते में डाल दी, जिसमें से 75 प्रतिशत राशि एसआरएलएम को समूहों के खातों में डालना थी।
शिवपुरी में भ्रष्टाचार की शुरूआत यहीं से हो गई, सितम्बर माह में एसआरएलएम ने 176 समूहों के खाते में पैसा डालना स्वीकार किया। तत्कालीन डीपीसी शिरोमणि दुबे के निरीक्षण में भी कपड़ा खरीदना और डे्रस बनना सामने आया परंतु जिन 176 समूहों के खाते में पैसा डाला गया था उनमें से अधिकतर समूहों की महिलाओं को खाते में पैसा आने तथा ड्रेस बनाने के संबंध में जानकारी ही नहीं थी। इस मामले की पत्रिका ने परत दर परत पड़ताल शुरू की और 2 लाख 40 हजार बच्चों को बंटने वाली ड्रेस के मामले में घोटाले को उजागर किया परंतु तत्कालीन कलेक्टर शिल्पा गुप्ता मौन साधे बैठी रहीं और तो और क्वालिटी कंट्रोल की टीम में शामिल डीपीसी शिरोमणि दुबे द्वारा मामले की पड़ताल शुरू करने पर उन्हें भी अनाधिकृत रूप से टीम से बाहर कर दिया था।
इसी क्रम में एडवोकेट राजीव शर्मा ने मामले की शिकायत 21 दिसम्बर 2018 को सीएम कमलनाथ सहित ईओडब्ल्यू भोपाल को दर्ज कराई। राजीव शर्मा द्वारा प्रदान किए गए तथ्यों के आधार पर ईओडब्ल्यू की लीगल सेल ने पूरे मामले की जांच की और पाया कि शिकायत दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की जा सकती है। इसी क्रम में 5 मार्च को शिवपुरी की तत्कालीन कलेक्टर शिल्पा गुप्ता, एसआरएलएम के डीपीएम अरविंद भार्गव सहित अन्य के खिलाफ शिकायत क्रमांक 31/19 दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
ऐसे हुआ डे्रस घोटाला
शासन स्तर से जो नियम बना उसके अनुसार पैसा सीधा समूहों के खाते में डालना था। इस राशि का आहरण समूह की महिलाओं को करना है तथा इसके बाद निर्धारित कपड़े का क्रय भी समूह की महिलाओं को करना था तथा ड्रेस सप्लाई की जिम्मेदारी भी समूह की महिलाओं की थी, परंतु एसआरएलएम ने महिलाओं के खाते में पैसा डलवा कर उसका आहरण अन्य माध्यमों से करवा कर सीएलएफ (क्लस्टर लेबल फेडरेशन)के माध्यम से खरीदी करवाई। खास बात यह है कि अधिकतर स्व सहायता समूह की महिलाओं को खाते में पैसे आने और आहरण आदि की जानकारी ही नहीं थी। जब अभाविप ने इस घोटाले का विरोध करते हुए कलेक्ट्रेट व कलेक्टर बंगले पर धरना दिया तो उन पर पुलिस द्वारा बल का प्रयोग कराया गया।
पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
पत्रिका द्वारा प्रकाशित खबरों के बाद स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर धीरेंद्र सिंह ने मोहर्रम के अवकाश वाले दिन ड्रेस की क्वालिटी का परीक्षण किया। जब पत्रिका ने डीपीएम से मामले की जानकारी चाही तो उन्होंने किसी जांच दल के आने की बात को नकार दिया। पत्रिका ने 23 सितम्बर को फोटो सहित खबर प्रकाशित कर डीपीएम के झूठ को उजागर किया।
मैंने शिवपुरी जिले में 2 लाख 40 हजार स्कूली बच्चों को गणवेश वितरण की 14 करोड 40 लाख रुपए की राशि में से लगभग 7 करोड से अधिक के गंभीर घोटाले में कलेक्टर शिल्पा गुप्ता व आजीविका मिशन प्रबंधक सहित अन्य के विरूद्ध शिकायत ईओडब्ल्यू में की थी, जिसे आर्थिक आपराध विंग ने 31/19 पर दर्ज कर जिम्मेदारों के विरूद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की है।
राजीव शर्मा, शिकायतकर्ता एडवोकेट
मैंने इस मामले को प्रारंभिक दौर में ही उजागर करने का प्रयास किया तो, नियम विरूद्ध तरीके से मुझे क्वालिटी कंट्रोल की टीम से हटा दिया गया। मामले में इतने साक्ष्य हैं कि दोषियों पर कार्रवाई तय है।
शिरोमणि दुबे, तत्कालीन डीपीसी
भोपाल से आया जांच दल ड्रेस की क्वालिटी जांचता हुआ और स्कूली बच्चे वितरित की गई दोरंगी व दोयम दर्जे की ड्रेस पहने हुए। फाइल फोटो
Published on:
24 Mar 2019 04:55 pm
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