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high court case status: हाईकोर्ट ने स्वर्ण रेखा के सौंदर्यीकरण (swarnrekha beautification case) और केदारपुर लैंडफिल साइट पर कचरे के पहाड़ पर निगम अधिकारियों के गैरजिम्मेदाराना रवैये और गोल मोल जवाब पर फटकार लगाई। बुधवार को जस्टिस रोहित आर्या और विनोद कुमार द्विवेदी ने सुनवाई के दौरान कहा कि क्या यहां पर मॉक ड्रिल या मूट कोर्ट चल रहा है। आप कागज पेश करते रहें और हम बैठकर पढ़ते रहें। 6 महीने से कोर्ट आदेश दे रहा है, लेकिन हर बार वैसी ही स्थिति रहती है। हमें तो अब शंका होने लगी है कि कोर्ट के आदेश आगे नहीं पहुंचाए जा रहे हैं। 27 फरवरी को याचिका की फिर से सुनवाई होगी।
हाईकोर्ट ने 6 फरवरी 2024 को चार बिंदु निर्धारित कर स्पष्ट जानकारी देने का आदेश दिया था। बुधवार को नगर निगम आयुक्त हर्ष सिंह, स्मार्ट सिटी सीईओ नीतू माथुर गोल-गोल जवाब के साथ न्यायालय के सामने पेश हुए। अपर आयुक्त विजय राज ने शपथ पत्र पेश किया। इसमें जो जानकारी दी थी, उसमें न दस्तावेज देखे और न भोपाल से कोई जानकारी ली। उपायुक्त एपीएस भदौरिया ने अपने अनुभव के आधार पर जानकारी न्यायालय में पेश कर दी। नगर निगम अधिकारियों की इस लापरवाही पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। करीब डेढ़ घंटे सुनवाई में अधिकारियों को आइना दिखाया। कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी को निर्देश दिए कि अधिकारियों को काम करने का तरीका बताएं।
कोर्ट ने पूछा-लैंडफिल साइट पर जमा कचरे को कितने दिन में हटा देंगे। आयुक्त ने कहा, 150 दिन लगेंगे। सूखे कचरे के लिए चार मशीनें लगी हैं और गीले कचरे के लिए अलग से मशीन हैं।
कोर्ट ने कहा कि शहर की चिंता किसी ने नहीं की, छह महीने से जनहित याचिका की सुनवाई कर रहे हैं। सिर्फ कोर्ट का समय बर्बाद करने के अलावा कुछ नहीं किया। मिस्टर कमिश्नर, ईमानदारी से बताओ कि इतने दिन में कितना पैसा निगम को मिल चुका है। आयुक्त ने कहा कि 8.50 करोड़ के वाहन खरीदने की अनुमति मिली है।
Updated on:
22 Feb 2024 03:22 pm
Published on:
22 Feb 2024 03:19 pm
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