
ग्वालियर। हाईकोर्ट की युगल पीठ ने स्वर्ण रेखा नदी को लेकर प्रशासनिक रवैए पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदारों को फटकार लगाई। कोर्ट ने अमृत काल (प्रोजेक्ट) पर टिप्पणी करते हुए कहा, क्या आप अफसरों को लगता है इसके नाम पर आपके सारे खुराफाती काम ढंक जाएंगे? आप कोर्ट को ऐसे बता रहे जैसे अमृतकाल में स्वर्ग जैसा काम हो रहा हो। जब सवाल पूछो अमृत काल बताने लगते है। जादुई शब्द ढंूढ लाए हो, क्या है यह अमृतकाल। सीवेज का पानी सडक़ों पर बह रहा है। जनता को मूर्ख समझते हो। जिसकी तनख्वाह लेते हो वो जिम्मेदारी नहीं निभाते हो, जनता से जिसका टैक्स लेते हो वो काम नहीं करते हो।
गुरुवार को कोर्ट रूम में उस वक्त सांस फूल गई जब उनसे पूछा गया कि स्वर्ण रेखा पर कितना खर्च किया गया और सीवर लाइन बिछाने और उसकी मरम्मत पर कितना खर्च किया गया। कोर्ट को रिपोर्ट पेश करने का तर्क रखकर अफसर फंस गए, बार-बार पूछने के बाद भी वे कोई ब्यौरा पेश नहीं कर पाए। इसी को लेकर हाईकोर्ट ने कहा कि हम गंभीर रूप से सोच रहे हैं। पूरे काम में भारी गड़बड़ी लग रही है, आप झूठ बोलेंगे तो आपके खिलाफ सीबीआइ जांच के आदेश कर देंगे। कोर्ट ने पूरी जानकारी देने के लिए सोमवार तक का समय दिया है। याचिका की सुनवाई जस्टिस रोहित आर्या व जस्टिस राजेन्द्र कुमार वानी ने की।
बता दें कि यह याचिका विश्वजीत रतौनिया ने स्वर्ण रेखा नदी के सौंदर्यीकरण को लेकर दायर की है। कोर्ट ने स्वर्ण रेखा नदी के सौंदर्यीकरण के मामले को संज्ञान में लिया है। पिछले छह महीने से कोर्ट में तथ्य पेश करने के बजाय बार-बार नई कहानी बताने पर ऐतराज जताया है। कर्मचारी बनने लायक नहीं और अपर आयुक्त बन गए निगम की ओर से ओआईसी अपर आयुक्त विजयराज से कोर्ट ने कहा, आप कर्मचारी बनने लायक नही हैं और अपर आयुक्त बन गए। काम को लेकर कितने गंभीर हो यहां दिख रहा है। पूछने पर कोर्ट में खड़े होकर पन्ने फडफ़ड़ा रहे हो। काम धैले का नहीं आता है। सारा पैसा कुएं में डाल दिया है। कौन तलाश करे कि किस कुएं में कितना पैसा गया। कुछ काम किया है तब कुछ लिखोगे। कितना पैसा खर्च कर चुके हैं और कितना खर्च करोगे। उसके बाद स्वर्ण रेखा नदी की मेन ट्रंक लाइन की बात करेंगे। पहले के जो लोग गड़बड़ कर गए हैं, उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
- यह अमृत काल क्या है। निगम अधिवक्ता ने बताया कि अमृत प्रोजेक्ट था। कोर्ट ने कहा कि प्रोजेक्ट अमृत में सीवेज का पानी बह रहा है। जनता व कोर्ट दोनों को मूर्ख बना रहे हो। फिर अफसरों पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, आप बिना तैयारी किए कोर्ट में आ जाते हैं। यहां बातों को घुमाते हैं। आपको जेल भिजवा दूंगा। आप मेरी क्वेरीज को ठीक से समझ लीजिए। जब मुकदमा लगगता तब फाइल खुलती है। सीबीआइ जांच की चेतवानी सीवर लाइन के निर्माण, मेंटेनेंस व स्वर्ण रेखा पर कितना खर्च किया है। यदि हमारे सामने सारे पेपर नहीं आए तो सीबीआइ की जांच कराएंगे। पिछली पेशी पर रिपोर्ट दी है तो कागज कहां गए। मिस्टर विजय राज हमने कहा था कि 2014 से 2024 कितना पैसा खर्च हुआ था, आयुक्त बोलकर गए थे कि कागज पेश करेंगे। अब नहीं की बात कर रहे हो। सारा रिकॉर्ड सीज करा देंगे।
सीवेज लाइन के नाम पर आप लोगों ने सरकार से बहुत पैसा लिया है। आप बता नहीं रहे हो। इसके भी कागज लाओ। कोर्ट ने प्रशासन की हकीकत बताई कोर्ट ने कहा कि अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। इस शहर का जो भाग्य है, वही रहेगा। स्वर्ण रेखा नाला है और नाला रहेगी। जहां कचरा डालना है वहां डालो। सीवेज डालो। नाले को गा बना दो। ये सब करो। बैंच और लाइट लगाओ। स्वर्ण रेखा नाला को लोग भूल गए। स्वर्ण रेखा रहे या न रहे। पानी नहीं मिलेगा तो सरकार टैंकर खरीदकर पिलवाएगी। न जनता को फिक्र है और न अधिकारियों को, फिर कोर्र्ट क्यों जबरदस्ती चिंता करे। रहने दो जो चल रहा है।
- छह महीने से सिर्फ प्लानिंग-प्लानिंग हो रही है। एक इंच काम नहीं बढ़ा है। 2014 से 2024 तक का हिसाब पेश करने सोमवार तक का वक्त
- स्वर्ण रेखा नदी रिवाइवल पर कितना पैसा आया, कितना खर्च ?
- सीवर लाइन बिछाने और उसकी मरम्मत पर कितना खर्च किया ?
- सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पर कितना पैसा आया कितना खर्च किया?
- गार्बेज कलेक्शन पर कितना पैसा आया, कितना खर्च किया?
- सीवेज पर इतना खर्च, कार्य का विवरण राशि खर्च
- सीवेज पर इतना खर्च
- कार्य का विवरण राशि खर्च
- लालटिपारा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट 55.568
- लाल टिपारा पंपिंग स्टेशन 1.623
- शताब्दीपुरम ट्रीटमेंट प्लांट 6.112
- सीवेज नेटवर्क 144.657
- योग 207
( खर्च की राशि करोड़ में है।)
- कुलदीप नर्सरी के पास बह रहे नाले के पानी का नगर निगम व अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर को संयुक्त रूप सैंपल लेने थे। नगर निगम के अधिकारियों को सैंपल लेने के लिए बुलाया गया था, लेकिन निगम अधिकारी नहीं आए। अवधेश सिंह तोमर ने अकेले सैंपल लिए। यह जानकारी न्यायालय में पेश की। रिपोर्ट पर निगम ने आपत्ति दर्ज कराई। कोर्ट ने कहा कि 15 दिन का समय मिला, लेकिन सैंपल नहीं लिए। अब एकसाथ जाकर सैंपल लें। एक-दूसरे के सैंपल पर सील लगाएं और उसपर साइन भी करें। फिर इन्हें जांच के लिए लैब भेजें।
Updated on:
13 Apr 2024 08:52 am
Published on:
13 Apr 2024 08:50 am
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