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एमपी में वेतन वृद्धि पर हाईकोर्ट की सख्ती, सरकार को रिट खारिज करने की दी चेतावनी

salary hike- वेतन वृद्धि के मामले पर एमपी हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य सरकार को रिट खारिज कर देने की चेतावनी दी है।

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Orders to pay all dues of guest teachers by May 5

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Salary Hike- वेतन वृद्धि के मामले पर एमपी हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य सरकार को रिट खारिज कर देने की चेतावनी दी है। कोर्ट ने पूछा है कि देर से अपील दायर करने वाले अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है! कारण नहीं बताने पर रिट अपील खारिज हो जाएगी। जल संसाधन विभाग के टाइम कीपर रहे ईश्वर सिंह राजपूत ने पे स्केल को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए वेतन वृद्धि का आदेश दिया था। इसके खिलाफ शासन ने रिट अपील दायर की। अपील देर से पेश करने के संबंध में कोर्ट ने कारण पूछा, लेकिन सरकार वजह नहीं बता पाई।

ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने शासन को देर से अपील दायर करने के लिए फिर से आवेदन पेश करने का एक और मौका दिया है, लेकिन इस आवेदन में देर का पूरा कारण बताना होगा। देर से अपील दायर करने वाले अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई कर रहे हैं, कितने दिन फाइल टेबिल टू टेबल घूमी, अपील दायर करने का फैसला कब लिया गया था। इन कारणों को पेश नहीं किया जाता है तो अपील कोर्ट खारिज कर देगा।

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ईश्वर सिंह राजपूत जल संसाधन विभाग में टाइम कीपर के पद पर कार्यरत थे। पे स्केल को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने 17 अगस्त 2023 को ईश्वर शर्मा के पक्ष में फैसला दिया। वेतन दिए जाने का आदेश दिया था।

इसके खिलाफ शासन ने मार्च 2024 में रिट अपील दायर की। अपील देर से पेश करने के संबंध में कोर्ट ने कारण पूछा, लेकिन शासन देर का कारण नहीं बता पाया। शासन के अधिवक्ता ने फिर से आवेदन पेश करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने देरी के कारण पूछे हैं। रिट अपील पर 21 अप्रेल को फिर से सुनवाई होगी।

3050-4590 रुपए का वेतनमान दिए जाने का आदेश

ईश्वर सिंह राजपूत वर्क चार्ज स्थापना में टाइम कीपर के पद पर नियुक्ति किया गया था। दैनिक वेतनभोगी के रूप में उन्होंने काम किया। समान रूप से नियुक्ति किए गए कर्मचारियों का 2003 में वेतन बढ़ा दिया गया, लेकिन ईश्वर राजपूत को इसका लाभ नहीं दिया गया।

इसपर ईश्वरसिंह राजपूत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने पुन: आवेदन पर विचार करने का आदेश दिया, लेकिन शासन ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि वह हकदार नहीं है। इसके चलते दोबारा याचिका दायर की। कोर्ट ने 3050-4590 रुपए का वेतनमान दिए जाने का आदेश दिया। दो महीने के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।