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शादीशुदा महिला को हाईकोर्ट ने नहीं दी लिव इन में रहने की इजाजत, जानिए पूरा मामला

पति को छोड़कर दो बच्चों के साथ मुंबई में दूसरे शख्स के साथ लिव इन में रह रही थी महिला...  

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ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच की एकलपीठ ने एक शादीशुदा महिला को लिव इन रिलेशन में रहने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। लिव इन रिलेशन में रहने की अनुमति देने के लिए महिला ने याचिका दायर की थी वहीं महिला के पति ने भी कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि कोई भी शादीशुदा किसी दूसरे विवाहित व्यक्ति के जीवन में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

शादीशुदा महिला को लिव इन में रहने की इजाजत नहीं
ग्वालियर के बहोडापुरा क्षेत्र में रहने वाले अंकित कुमार (बदला हुआ नाम) ने कोर्ट में याचिका दायर करते हुए बताया था कि उसकी पत्नी आरती (बदला हुआ नाम) उसे छोड़कर दोनों बच्चों के साथ मुंबई में मनीष (बदला हुआ नाम) नाम के शख्स के साथ लिव इन में रह रही है। पति अंकित ने ये भी आरोप लगाया था कि प्रेमी मनीष उसकी पत्नी आरती व बच्चों को बंधक बनाकर रखता है उन्हें मुक्त कराया जाया। वहीं अंकित की पत्नी आरती ने भी कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें पति पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए प्रेमी के साथ लिव इन रिलेशन में रहने की अनुमति मांगी गई थी। कोर्ट ने दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए आरती को लिव इन में रहने की इजाजत देने से इंकार कर दिया।

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कोर्ट ने ये दिया आदेश
कोर्ट ने दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की और आरती को तीन दिन के लिए नारी निकेतन में रहने भेज दिया है। बच्चे भी उसके साथ ही रहेंगे। इसके बाद आरती के पिता उसे अपने साथ ले जा सकते हैं। बच्चे भी साथ ही जाएंगे। यदि महिला के पिता उसे नहीं ले जाते हैं तो बच्चों को उनके पिता यानी याचिकाकर्ता को सौंप दिए जाएं। इस स्थिति में महिला जब तक चाहे नारी निकेतन में रह सकती है। यदि वह वहां से कहीं जाना भी चाहती है तो उसे पहले बताना होगा। बता दें कि प्रेमी मनीष की पत्नी ने भी कोर्ट में अंतरिम आवेदन देते हुए पति को आरती के चंगुल से छुड़ाने की मांग की थी।

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