
Holi 2023
ग्वालियर। रंगों का पर्व होली 8 मार्च को है। इसके लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। रंग बनाने का काम तेजी से हो रहा है। लेकिन अब लोग कैमिकल से बने रंगों से बचना चाहते हैं और प्राकृतिक हर्बल रंगों को ज्यादा पसंद करने लगे हैं। इसलिए इस साल भी प्राकृतिक रंगों का बोलबाला रहने वाला है। इसके लिए बाजारों के साथ कई संस्थाएं हर्बल रंग तैयार कर रही हैं। यह रंग पलाश के फूल, चुकंदर और हल्दी आदि से बनाए जा रहे हैं। हालांकि पिछले वर्ष से इनके दामों में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। वन विभाग ने भी हर्बल गुलाल बिक्री के लिए उपलब्ध करा दिए हैं।
पलाश के फूलों का टी बैग भी बाजार में
शहरवासियों को अब हर्बल कलर खासे पसंद आते हैं। इनके तैयार करने में खास ध्यान रखा जाता है। पलाश के फूलों से रंग और गुलाल तैयार करने वाली मीनाक्षी नागर ने बताया कि इस बार एक टन से अधिक हर्बल गुलाल तैयार कर चुके हैं। इनकी बाजार में अभी से मांग आने लगी है। बाजार में हर्बल गुलाल 55 रुपए का 100 ग्राम और एक किलो 350 रुपए का है। साथ ही पलाश के फूलों का टी बैग कलर भी बनाया है। एक टी बैग 50 रुपए का है, जिससे 7 लीटर रंग तैयार किया जा सकता है।
ऐसे तैयार हो रहे हर्बल रंग
पलाश, हल्दी और चुकंदर का गुलाल बनाने के लिए पहले इन्हें भिगोने के बाद पीसा जाता है। करीब चार घंटे भिगोने के बाद इनसे रंग निकाला जाता है। इस रंग में एक निश्चित मात्रा में स्टार्च और आरारोट मिलाकर करीब 4 घंटे तक सुखाया जाता है। अंत में इसमें इत्र के रूप में अलग-अलग तरह की सुगंध मिलाई जाती है। रंग का जो पानी बचता है उससे गीले रंग के रूप में उपयोग किया जाता है।
वन विभाग ने निकाले चार तरह के गुलाल
सुरक्षित होली के लिए लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र, बरखेड़ा पठानी भोपाल की ओर से प्राकृतिक रंग और गुलाल तैयार किए गए हैं। इस बार हरा, गुलाबी, पीले और सिंदूरी रंग के गुलाल तैयार किए गए हैं। इन्हें आरारोट से बनाया गया है। इसमें कलर के लिए मप्र के जंगलों में मिलने वाले विभिन्न पेड़ों के बीज, फूल, पत्ते, बेलपत्र, पालक, हल्दी, चुकंदर, पलाश और सिंदूरी का इस्तेमाल गया है। त्वचा के लिए यह उबटन का काम करता है। गुलाल में खुशबू के लिए रोज, केवड़ा आदि का अर्क मिलाया गया है।
Published on:
23 Feb 2023 05:15 pm
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